अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में कृषि अर्थशास्त्र विभाग का शोध पत्र प्रस्तुत
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प्रयागराज (उ.प्र.) में अप्रैल 2026 में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “विकसित भारत @2047: इनोवेशन, डिजिटलीकरण एवं एंटरप्रेन्योरशिप इन एग्रीकल्चरल साइंस (IDEAS)” में कृषि अर्थशास्त्र एवं कृषि व्यवसाय प्रबंधन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र कुमार विश्वकर्मा ने सक्रिय सहभागिता करते हुए शोध पत्र का सारांश प्रस्तुत किया। सम्मेलन का आयोजन सैम हिगिनबॉटम कृषि, प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान विश्वविद्यालय के नैनी कृषि संस्थान द्वारा किया गया।सम्मेलन में देश-विदेश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों ने भाग लिया।

मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. साकेत कुशवाहा, कुलपति, यूनिवर्सिटी ऑफ लद्दाख उपस्थित रहे। इस अवसर पर कृषि एवं ग्रामीण विकास से जुड़े समसामयिक विषयों पर व्यापक चर्चा एवं विचार-विमर्श हुआ।डॉ. विश्वकर्मा द्वारा प्रस्तुत शोध सारांश “छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में ब्रॉयलर उत्पादन पर आय एवं रोजगार सृजन के प्रभाव का आकलन” विषय पर आधारित था। इस शोध के सह-लेखक नेहा सोनी हैं।

अध्ययन में पाया गया कि ब्रॉयलर उत्पादन गतिविधियों के विस्तार से किसानों एवं उत्पादकों की आय में वृद्धि के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर सृजित होते हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है। शोध में यह भी उल्लेख किया गया कि ऐसी गतिविधियां आत्मनिर्भर भारत एवं विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।उक्त शोध सारांश एवं शोध पत्र का प्रकाशन शीघ्र ही एक स्कोपस सूचीबद्ध अंतरराष्ट्रीय जर्नल में किया जाएगा।
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