स्ट्रॉबेरी की लाभकारी खेती अब विंध्य क्षेत्र में: डॉ अनुपम सिंह,फैकल्टी ए के एस यूनिवर्सिटी,
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स्ट्रॉबेरी की लाभकारी खेती अब विंध्य क्षेत्र में: डॉ अनुपम सिंह,फैकल्टी ए के एस यूनिवर्सिटी,सतना।सतना। स्ट्रॉबेरी की खेती दुनिया भर में व्यापक रूप से की जाती है यह फल अपने स्वाद में औषधि गुणों से भरपूर होने के कारण एक विशेष प्रकार से ख्याति प्राप्त है।

इनकी खेती मैदानी इलाकों में की जा सकती है। प्रति कुलाधिपति ई.अनंत सोनी जी की प्रेरणा से एंव इस अधिष्ठाता कृषि संकाय डा. अशोक कुमार भौमिक के मार्गदर्शन में,डॉ अनुपम सिंह, डॉ मोहिनी परमार, डॉ गौरव एवं डॉ इमामुद्दीन शाह के द्वारा उद्यान विभाग, ए. के. एस. विश्वविद्यालय में किए गए शोध कार्य में यह पाया है कि स्ट्रॉबेरी की खेती को सतना तथा उसके आसपास के क्षेत्रों में यदि सही प्रजातियों का चयन एवं अच्छा प्रबंधन किया जाए तो इस फल दार पौधों की खेती कर के अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है।

स्ट्रॉबेरी की कुछ प्रजातियां जैसे कैमारोजा, स्वीट चार्ली, विंटर डाउन, यह प्रजाति खाने में बेहद स्वादिष्ट और अधिक उत्पादन देने वाली हैं। इनकी खेती मैदानी इलाकों में की जा सकती है। इसकी खेती के लिए उपयुक्त जल निकास वाली रेतीली दोमट मिट्टी जिसका पी. एच. मान 5.5 से 6.5 हो सर्वोत्तम होती है। इसकी खेती के लिए गोबर की सड़ी हुई खाद अच्छी तरह से मिट्टी में मिला दें और रासायनिक खाद के प्रयोग से पहले वे अपने निकटतम मृदा स्वास्थ्य परिक्षण प्रयोग शाला, ए. के. एस. विश्वविद्यालय, सतना में जाकर मिटटी की जांच कराएं उसके रिपोर्ट के अनुसार ही नत्रजन फास्फोरस और पोटाश का प्रयोग करें। यदि हमारे किसान भाई रासायनिक उर्वरक के स्थान पर जैव उर्वरक का प्रयोग करें तो वह एक मृदा स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होगा तथा फसल का उत्पादन भी बढ़ेगा।पौधों की रोपाई 10 सितम्बर से 15 अक्तूबर तक की जानी चाहिए। खेत मे बेड की चैड़ाई 2 फिट रखे और बेड से बेड की दूरी 1.5 फिट रखे। जमीन से बेड की ऊँचाई 25-30 सेंटीमीटर होनी चाहिए। बेड तैयार होने के बाद उस पर टपक सिंचाई की पाइपलाइन बिछा दे। पौध रोपण के बाद जब पौधों में फूल आने लगें तो उस समय मल्चिंग की प्रक्रिया शरू कर देना चाहिए। यह पौध लगाने के 45 दिन बाद फूल आना तथा फल 60 दिन बाद आने लगते हैं स्ट्रॉबेरी के पौधे जनवरी में फल देना प्रारम्भ कर देते हैं जो मार्च तक उत्पादन देते रहते हैं। फल की तोड़ाई फल का रंग आधे से अधिक लाल हो जाए तो इसकी तुड़ाई कर देनी चाहिए. फलों को तोड़ने के लिए सुबह का समय सर्वोत्तम होता है फल का उत्पादन लगभग 7 से 10 टन प्रति हैक्टेयर या हर 1 से 1.5 किलो फल प्रति पौधा मिल जाता है फलों को बेच कर कुल लागत का लगभग 6 से 7 लाख रुपये प्रति हैक्टर की दर से शुद्ध लाभ मिल जाता है। यदि किसान भाई और अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो वे विश्वविद्यालय, उद्यानिकी विभाग से संपर्क कर सकते हैं जहां पर उनको संपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।लेखक वर्तमान समय में ए. के. एस. विश्वविद्यालय, सतना में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं।
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