ए के एस विश्वविद्यालय, सतना में जैविक खाद “अमृत संजीवनी” का निर्माण।
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सतना, मध्य प्रदेश — सतत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, ए के एस विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान संकाय द्वारा जैविक खाद “अमृत संजीवनी” के निर्माण पर एक व्यावहारिक प्रदर्शन (प्रैक्टिकल डेमोंस्ट्रेशन) आयोजित किया गया।

इस गतिविधि का सफल संचालन बी.एससी. (ऑनर्स) कृषि 8वें सेमेस्टर के विद्यार्थियों कुमारी सृष्टि त्यागी और मास्टर आर्यन मिश्रा द्वारा किया गया, जिसमें मास्टर राहुल कालार ने महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया। यह कार्यक्रम डॉ. सुग्यता शिवहरे, मृदा विज्ञान विभागाध्यक्ष, कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संकाय के मार्गदर्शन एवं पर्यवेक्षण में संपन्न हुआ।

“अमृत संजीवनी” एक पर्यावरण अनुकूल एवं पोषक तत्वों से भरपूर जैविक खाद है, जो मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने, सूक्ष्मजीव गतिविधि को प्रोत्साहित करने तथा पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में सहायक है। यह एक कम लागत वाली प्राकृतिक कृषि इनपुट है, जो जीरो बजट नेचुरल फार्मिंग जैसी पद्धतियों के समान है। इसे गाय के गोबर, गोमूत्र, गुड़ तथा दाल के आटे जैसे स्थानीय रूप से उपलब्ध पदार्थों से तैयार किया जाता है, जिससे खेती की लागत कम होती है और दीर्घकालिक स्थिरता बढ़ती है। इससे किसानों को कम खर्च, बाजार पर निर्भरता में कमी तथा कृषि लाभ में वृद्धि होती है।
डॉ. शिवहरे ने बताया कि प्राकृतिक खेती की फील्ड स्टडी के अनुसार अमृत संजीवनी के उपयोग से गेहूं एवं धान जैसी फसलों में 10–20% तक उत्पादन वृद्धि देखी गई है, जो मिट्टी एवं प्रबंधन परिस्थितियों पर निर्भर करती है। उन्होंने जैविक खेती के बढ़ते महत्व पर जोर देते हुए विद्यार्थियों को रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने वाली टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। ऐसे प्रयास न केवल मिट्टी की गुणवत्ता सुधारते हैं बल्कि पर्यावरण संरक्षण एवं दीर्घकालिक कृषि उत्पादकता में भी योगदान देते हैं।
अमृत संजीवनी का निर्माण विद्यार्थियों के लिए एक अत्यंत उपयोगी और ज्ञानवर्धक अनुभव रहा। इससे उन्हें प्राकृतिक खेती, कम लागत वाली कृषि तकनीकों, टीम वर्क कौशल तथा मृदा स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता प्राप्त हुई। विद्यार्थियों ने कृषि संकाय के डीन डॉ. ए. के. भोमिक, तथा डॉ. नीरज वर्मा, कृषि विभागाध्यक्ष के सहयोग एवं मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया।

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