कोयला खदान को हरी झंडी की ओर बढ़त: वन भूमि डायवर्जन प्रस्ताव केंद्र पहुंचा
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धरमजयगढ़ वनमंडल अंतर्गत पुरूँगा क्षेत्र में प्रस्तावित कोयला खदान परियोजना को लेकर प्रशासनिक प्रक्रिया तेज हो गई है। छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने मेसर्स अंबुजा सीमेंट लिमिटेड द्वारा प्रस्तावित भूमिगत कोयला खदान के लिए 621.331 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्जन का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया है।
जानकारी के अनुसार, इस प्रस्ताव में लगभग 9.982 हेक्टेयर क्षेत्र में अधोसंरचना और भूमिगत कार्य (इंक्लाइन सहित) विकसित किए जाने का प्रावधान है। यह पूरा प्रकरण वन (संरक्षण एवं संवर्धन) अधिनियम 1980 के तहत तैयार किया गया है तथा सभी आवश्यक औपचारिकताओं और दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए आगे बढ़ाया गया है।
राज्य स्तर पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (भू-प्रबंधन) की अनुशंसा के बाद प्रस्ताव को पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, नई दिल्ली को अग्रेषित किया गया है। अब इस पर अंतिम निर्णय केंद्र स्तर पर लिया जाएगा।
इस घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में एक बार फिर खनन परियोजनाओं को लेकर चर्चा तेज होने के संकेत हैं। धरमजयगढ़ क्षेत्र पूर्व में भी कोल ब्लॉकों को लेकर संवेदनशील रहा है, ऐसे में अब सबकी नजर केंद्र सरकार के फैसले और इसके संभावित सामाजिक व पर्यावरणीय प्रभावों पर टिक गई
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