September 1, 2026

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रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत सिसरिंगा में अमृत सरोवर योजना से निर्मित तालाब के प्रभावित होने का...

विशेष समाचार: जशपुर के बुढाडाड में युवाओं की 'नशा मुक्ति' मुहिम लाई रंग, समाज में बड़े बदलाव की आहट बुढाडाड...

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गेरवानी उपकेंद्र से बोजिया तक प्रस्तावित विद्युत लाइन परियोजना पर बढ़ी जांच, अतिरिक्त जानकारी नहीं मिलने से प्रक्रिया लंबित धरमजयगढ़...

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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET) के 22वें संस्करण के आयोजन को लेकर सार्वजनिक सूचना...

पीएमश्री स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम विद्यालय धरमजयगढ़ में 14 मई को होगी प्रवेश हेतु लॉटरी प्रक्रिया धरमजयगढ़ स्थित पीएमश्री स्वामी आत्मानंद शासकीय अंग्रेजी माध्यम विद्यालय में शैक्षणिक सत्र 2026-27 हेतु प्रवेश प्रक्रिया पूर्ण करने के लिए लॉटरी आयोजन की तिथि घोषित कर दी गई है। विद्यालय प्रबंधन से प्राप्त जानकारी के अनुसार 14 मई 2026 को प्रातः 10 बजे स्कूल प्रांगण में चयन समिति की उपस्थिति में लॉटरी प्रक्रिया संपन्न कराई जाएगी।बताया गया है कि निर्धारित सीटों के लिए प्राप्त आवेदनों के आधार पर पारदर्शी तरीके से आम जनता एवं जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में लॉटरी निकाली जाएगी, जिसके माध्यम से विद्यार्थियों को सीटों का आवंटन किया जाएगा।विद्यालय प्रबंधन ने अभिभावकों एवं संबंधित आवेदकों से समय पर उपस्थित रहने की अपील की है, ताकि प्रवेश प्रक्रिया निष्पक्ष एवं सुव्यवस्थित ढंग से पूरी की जा सके।

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रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ वनमंडल क्षेत्र में प्रस्तावित दुर्गापुर II सरिया कोल ब्लॉक परियोजना अब पर्यावरण और विस्थापन दोनों दृष्टि...

बायसी, बायसी कॉलोनी सहित 6 गांव होंगे प्रभावित : दुर्गापुर-द्वितीय सरिया कोल ब्लॉक में 12 हजार से अधिक पेड़ों की कटाई, 128 परिवारों पर विस्थापन का खतरा… फिर भी शांत है धरमजयगढ़रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ वनमंडल क्षेत्र में प्रस्तावित दुर्गापुर-द्वितीय सरिया कोल ब्लॉक परियोजना अब पर्यावरण और विस्थापन दोनों दृष्टि से बड़ी चर्चा का विषय बनती जा रही है। वन विभाग से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार परियोजना के लिए लगभग 290.399 हेक्टेयर वन भूमि को गैर वानिकी उपयोग हेतु प्रस्तावित किया गया है। वहीं इस परियोजना में करीब 12,528 पेड़ों की कटाई का अनुमान भी सामने आया है।पेड़ों की संख्या के लिहाज से देखें तो यह आंकड़ा अदानी समूह की अंबुजा सीमेंट प्राइवेट लिमिटेड के लिए पुरुँगा क्षेत्र में प्रस्तावित कोयला खदान की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक बताया जा रहा है। इसके बावजूद क्षेत्र में अब तक किसी बड़े विरोध प्रदर्शन या जनआंदोलन की स्थिति सामने नहीं आई है।प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख, छत्तीसगढ़ द्वारा जारी पत्र में कर्नाटक पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड, बेंगलुरु के आवेदन पर प्रारंभिक प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि वर्तमान में किसी भी प्रकार के कार्य प्रारंभ करने की अनुमति नहीं दी गई है और परियोजना अभी केवल प्रशासनिक एवं परीक्षण चरण में है।जानकारी के अनुसार परियोजना से धरमजयगढ़, धरमजयगढ़ कॉलोनी, मेढरमार, तराईमार, बायसी कॉलोनी और बायसी सहित कुल 6 गांव प्रभावित होंगे। इन गांवों के लगभग 128 परिवारों को भविष्य में विस्थापन की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।लेकिन सबसे अधिक चर्चा जिस बात को लेकर हो रही है, वह है क्षेत्र में बना असामान्य सन्नाटा। धरमजयगढ़ क्षेत्र में पूर्व में कई परियोजनाओं को लेकर अपेक्षाकृत कम प्रभावों पर भी तीव्र विरोध प्रदर्शन देखने को मिल चुके हैं, लेकिन इस बार 12 हजार से अधिक पेड़ों की कटाई और 128 परिवारों के संभावित विस्थापन के बावजूद माहौल शांत दिखाई दे रहा है।स्थानीय स्तर पर कुछ लोग इसकी एक बड़ी वजह बदलती सोच को भी मान रहे हैं। लोगों के बीच यह धारणा बनती दिखाई दे रही है कि यदि देश को बिजली चाहिए, उद्योग चाहिए और विकास चाहिए, तो उसके बदले कुछ न कुछ कीमत चुकानी ही पड़ेगी — चाहे वह जमीन हो, जंगल हो या पेड़ों की बलि। क्योंकि ऊर्जा आज देश की मूल आवश्यकता बन चुकी है और ऊर्जा के बिना बड़े विकास कार्यों की कल्पना संभव नहीं मानी जा रही।हालांकि इसके साथ ही यह सवाल भी बना हुआ है कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन आखिर कैसे कायम किया जाएगा। क्या हजारों पेड़ों की कटाई और ग्रामीणों के विस्थापन के बदले प्रभावित परिवारों को पर्याप्त पुनर्वास और भविष्य की सुरक्षा मिल पाएगी? क्या पर्यावरणीय क्षति की भरपाई संभव हो सकेगी? आने वाले समय में यही प्रश्न इस परियोजना की दिशा और जनस्वीकृति तय कर सकते हैं।