May 12, 2026

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13.22 हेक्टेयर वन भूमि पर बिजली लाइन का प्रस्ताव अटका, कलेक्टर की अनापत्ति समेत माँगी गईं कई अहम जानकारियां !

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गेरवानी उपकेंद्र से बोजिया तक प्रस्तावित विद्युत लाइन परियोजना पर बढ़ी जांच, अतिरिक्त जानकारी नहीं मिलने से प्रक्रिया लंबित


धरमजयगढ़ – जिले के छाल क्षेत्र अंतर्गत प्रस्तावित सौर ऊर्जा संयंत्र को जोड़ने के लिए गेरवानी से बोजिया तक बनाई जाने वाली 220 केवी दोहरा परिपथ विद्युत प्रसारण लाइन परियोजना अब अतिरिक्त दस्तावेजों और स्पष्टीकरण के अभाव में अटक गई है। लगभग 13.22 हेक्टेयर वन भूमि को गैर-वन उपयोग में लेने के इस प्रस्ताव पर वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने कई महत्वपूर्ण जानकारियां मांगी हैं, जिसके बाद मामला फिलहाल लंबित बताया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार यह परियोजना छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत पारेषण कंपनी के गेरवानी स्थित 220/132/33 केवी उपकेंद्र से ग्राम बोजिया (छाल) में प्रस्तावित गोदावरी एनर्जी लिमिटेड के सौर ऊर्जा संयंत्र तक विद्युत प्रसारण लाइन निर्माण से जुड़ी हुई है। इस परियोजना के लिए वन संरक्षण अधिनियम 1980 के तहत वन भूमि विचलन का प्रस्ताव 28 मार्च 2026 को प्रस्तुत किया गया था।
स्वीकृति प्रक्रिया के दौरान मंत्रालय स्तर पर दस्तावेजों की जांच में कई कमियां सामने आने के बाद अतिरिक्त आवश्यक जानकारी मांगी गई है। इनमें राजस्व वन क्षेत्र के संबंध में कलेक्टर की अनापत्ति प्रमाण पत्र, प्रस्तावित मार्ग की लंबाई और चौड़ाई का पूरा विवरण, राज्य एवं केंद्र सरकार के बीच हुए पत्राचार तथा अन्य आधिकारिक अभिलेख शामिल हैं।
दस्तावेजों में दर्ज स्थिति के अनुसार प्रारंभिक परीक्षण के बाद सदस्य सचिव द्वारा आवश्यक जानकारी मांगे जाने के कारण मामला फिलहाल परियोजना एजेंसी के पास लंबित है। स्पष्ट संकेत हैं कि जब तक मांगे गए दस्तावेज और स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं किए जाते, तब तक आगे की स्वीकृति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाएगी।
हालांकि इस परियोजना को सौर ऊर्जा विस्तार और विद्युत ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, लेकिन वन भूमि उपयोग और पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। वन क्षेत्र से गुजरने वाली प्रस्तावित विद्युत लाइन से बड़ी संख्या में पेड़ों और जैव विविधता पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठने लगे हैं।
अब नजर इस बात पर टिकी है कि संबंधित एजेंसियां मंत्रालय द्वारा मांगी गई जानकारियां कितनी जल्द उपलब्ध कराती हैं और परियोजना को आगे मंजूरी मिल पाती है या नहीं।

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