August 24, 2026

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ए.के.एस.यू. में नवप्रवेशियों का दीक्षारम्भ, शिक्षा के साथ संस्कार और कौशल पर जोर

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सतना। ए.के.एस. विश्वविद्यालय के सामाजिक विज्ञान एवं मानविकी तथा प्रदर्शन कला संकाय के नवप्रवेशी विद्यार्थियों के लिए आयोजित दीक्षारम्भ कार्यक्रम में शिक्षा के साथ अनुशासन, मानवीय मूल्यों, कौशल विकास और सांस्कृतिक चेतना को विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण का आधार बताया गया। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित इस इंडक्शन कार्यक्रम में विद्यार्थियों को शैक्षणिक व्यवस्था, आचार संहिता, नई शिक्षा नीति-2020, छात्र सुविधाओं और विश्वविद्यालय में उपलब्ध विभिन्न अवसरों से परिचित कराया गया।


कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन, सरस्वती पूजन एवं मंगलाचरण से हुआ। इसके बाद विश्वविद्यालय के कुलगीत की प्रस्तुति दी गई। मुख्य अतिथि डॉ. मनोज सिंह, डायरेक्टर, स्वामी विवेकानंद करियर गाइडेंस एवं ओएसडी, उच्च शिक्षा विभाग, मध्य प्रदेश ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने, अनुशासन बनाए रखने और लक्ष्य की प्राप्ति के लिए निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया।


विशिष्ट अतिथि प्रो. डॉ. हिमांशु पांडेय, प्रभारी वित्त अधिकारी एवं डीन, स्कूल ऑफ लॉ, डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय, सागर ने सार्वभौमिक मानव मूल्यों एवं मानवाधिकारों की आवश्यकता रेखांकित की। उन्होंने कहा कि शिक्षा का लक्ष्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में मानवीय संवेदना, नैतिकता तथा अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति समझ विकसित करना भी है।
कौशल और नई शिक्षा नीति पर फोकस
मानविकी विभागाध्यक्ष डॉ. ऊषा द्विवेदी ने अतिथियों का स्वागत एवं परिचय कराया। प्रो-वाइस चांसलर डेवलपमेंट डॉ. हर्षवर्धन ने कौशल-आधारित शिक्षा और पाठ्यक्रमों की उपयोगिता बताते हुए विद्यार्थियों को निरंतर अपने कौशल विकसित करने के लिए प्रेरित किया। डीन एकेडमिक एवं सीओई डॉ. शेखर मिश्रा ने विश्वविद्यालय की आचार संहिता, स्व-अध्ययन, पाठ्यक्रम संरचना और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी।
विश्वविद्यालय के लॉ एडवाइजर श्री सूर्यनाथ सिंह गहरवार ने मूल्य-आधारित शिक्षा की आवश्यकता बताई। डीन स्टूडेंट वेलफेयर ने छात्र सुविधाओं, कल्याणकारी गतिविधियों और विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान की व्यवस्था से अवगत कराया। डीन सोशल साइंस डॉ. सुधीर जैन ने एकाग्रता और अनुशासन को विद्यार्थी जीवन की सफलता का आधार बताया। एचओडी योग ने विश्वविद्यालय में उपलब्ध सुविधाओं तथा इंडक्शन कार्यक्रम के उद्देश्यों की जानकारी दी।
कला और संस्कृति से विद्यार्थियों का परिचय
असिस्टेंट डायरेक्टर, कल्चरल डायरेक्टोरेट एवं फैकल्टी ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स डॉ. दीपक मिश्रा ने सांस्कृतिक निदेशालय एवं प्रदर्शन कला के अंतर्गत संचालित पाठ्यक्रमों, गतिविधियों और विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध अवसरों की जानकारी दी। कल्चरल डायरेक्टोरेट, मानविकी विभाग एवं फैशन डिजाइन विभाग के विद्यार्थियों ने नृत्य, संगीत, गायन और फैशन सहित विभिन्न प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को जीवंत बना दिया। प्रस्तुतियों ने नवप्रवेशी विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की रचनात्मक गतिविधियों से जुड़ने का अवसर दिया।
एएनओ लेफ्टिनेंट प्राची सिंह ने एनसीसी की गतिविधियों, सुविधाओं और विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध अवसरों की जानकारी दी।
कार्यक्रम का संचालन डिप्टी डीन स्टूडेंट वेलफेयर श्री गौरव सिंह एवं फैकल्टी सदस्य श्री अभिषेक शुक्ला ने किया। फैशन विभाग के कोऑर्डिनेटर श्री प्रह्लाद मरावी ने आभार व्यक्त किया।
गुडीज के साथ यादगार हुआ पहला दिन
समापन अवसर पर नवप्रवेशी विद्यार्थियों को स्मृति स्वरूप विशेष गुडीज वितरित की गईं। विद्यार्थियों ने इन्हें उत्साहपूर्वक स्वीकार किया। विश्वविद्यालय में प्रवेश के बाद आयोजित यह पहला औपचारिक कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक मार्गदर्शन के साथ सांस्कृतिक और सामाजिक जुड़ाव का अवसर भी बना।
कार्यक्रम के सफल आयोजन पर विश्वविद्यालय के प्रो-चांसलर एवं चेयरमैन इंजी. अनंत कुमार सोनी, कुलपति प्रो. बी.ए. चोपड़े, प्रो-वाइस चांसलर डॉ. आर.एस. त्रिपाठी एवं प्रो. जी.सी. मिश्रा ने आयोजकगण और पूरी टीम को बधाई दी।
इस अवसर पर डॉ. पुष्पा सोनी, डॉ. पूर्णिमा सिंह, अश्वनी कुमार ओमरे, श्री शंखधर मिश्रा, श्रीमती निशा त्रिपाठी, ईशा यादव, रेनू शुक्ला, रेखा सिंह, अंशिका विश्वकर्मा, अदिति सिंह एवं बालकृष्ण मिश्रा सहित विश्वविद्यालय के अनेक शिक्षक एवं स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का मूल उद्देश्य नवप्रवेशी विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था और अनुशासन से परिचित कराने के साथ उन्हें कौशल विकास, छात्र कल्याण, सांस्कृतिक गतिविधियों और उपलब्ध अवसरों से जोड़ना रहा, ताकि उनका विश्वविद्यालयी जीवन ज्ञान, संस्कार, कौशल और रचनात्मकता के साथ आगे बढ़ सके।

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