एकेएस विश्वविद्यालय में उल्लास के साथ मनाई गई हरियाली तीज
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सतना (म.प्र.)। एकेएस विश्वविद्यालय में महिला विकास प्रकोष्ठ द्वारा हरियाली तीज का पर्व उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की महिला प्राध्यापकाओं और छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। हरियाली तीज के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति और परंपराओं की सुंदर झलक देखने को मिली। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्रीमती प्रीति सोनी, श्रीमती आरती सोनी और श्रीमती ज्योति सोनी उपस्थित रहीं। अतिथियों ने हरियाली तीज के सांस्कृतिक और पारंपरिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसे भारतीय लोक परंपरा से जुड़ा प्रमुख पर्व बताया।

उन्होंने महिला विकास प्रकोष्ठ की ओर से आयोजित कार्यक्रम की सराहना की।
कार्यक्रम का संचालन महिला विकास प्रकोष्ठ की सहायक निदेशक सुश्री प्रज्ञा श्रीवास्तव ने किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन महिलाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ-साथ आपसी मेलजोल और सौहार्द का अवसर प्रदान करते हैं। कार्यक्रम के आयोजन में श्रीमती साधना सोनी का विशेष सहयोग रहा।
हरियाली तीज के अवसर पर मेहंदी प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें छात्राओं ने उत्साह के साथ भाग लिया। छात्राओं ने आकर्षक मेहंदी डिजाइनों के माध्यम से अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता में रचनात्मकता, सफाई और डिजाइनों के आधार पर विजेताओं का चयन किया गया।

कार्यक्रम में महिला प्राध्यापकाओं के लिए विभिन्न मनोरंजक खेल भी आयोजित किए गए। खेलों में प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया, जिससे कार्यक्रम का वातावरण आनंदमय बना रहा। इसके साथ ही पारंपरिक गीत-संगीत और नृत्य की प्रस्तुतियां भी हुईं, जिन्होंने हरियाली तीज के उत्सव को और आकर्षक बना दिया।
हरियाली तीज के अवसर पर उपस्थित महिलाओं ने हरे रंग के परिधान धारण किए। हरे रंग के परिधानों और पारंपरिक प्रस्तुतियों से कार्यक्रम स्थल पर तीज के पर्व का माहौल दिखाई दिया।
कार्यक्रम के समापन पर विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए गए तथा प्रतिभागियों को उनकी सहभागिता के लिए सम्मानित किया गया। आयोजन समिति ने श्रीमती साधना सोनी के मार्गदर्शन और सहयोग के लिए विशेष आभार व्यक्त किया।
महिला विकास प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित हरियाली तीज का यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय की महिला प्राध्यापकाओं और छात्राओं के लिए उत्सव, सहभागिता और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ने का अवसर बना।
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