एकेएस विश्वविद्यालय की छात्राओं ने किसानों को सिखाई धान की वैज्ञानिक खेती सितपुरा में खेत पर हुआ विधि प्रदर्शन, ‘श्री विधि’ से जल-बीज की बचत और उत्पादकता बढ़ाने पर जोर
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सतना। एकेएस विश्वविद्यालय, सतना के कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संकाय द्वारा ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव (रावे) एवं कृषि-औद्योगिक संबद्धता कार्यक्रम के तहत सितपुरा गांव में किसानों के खेत पर धान की वैज्ञानिक खेती का विधि प्रदर्शन किया गया। सातवें सेमेस्टर की छात्राओं ने किसानों को आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण देते हुए कम जल और बीज में बेहतर उत्पादन के तरीके समझाए।

प्रदर्शन के दौरान सबसे पहले ‘किसान अर्क माइक्रोबियल कन्सोर्टियम’ तरल जैव उर्वरक के घोल से धान की पौध का वैज्ञानिक जड़ उपचार किया गया। इसके बाद श्री विधि के अनुसार निर्धारित दूरी और कतारबद्ध तरीके से धान की रोपाई करके किसानों को इसकी बारीकियां समझाई गईं। बताया गया कि जैविक जड़ उपचार और श्री विधि के समन्वित प्रयोग से पौधों का स्वस्थ विकास, जल एवं बीज की बचत तथा अधिक कल्ले निकलने में सहायता मिल सकती है।

कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संकाय के डीन डॉ. ए.के. भौमिक, रावे एवं एआईए कार्यक्रम समन्वयक अनूप शुक्ला तथा कृषि विभागाध्यक्ष एवं निदेशक अनुसंधान डॉ. नीरज वर्मा ने छात्राओं के किसान-केंद्रित प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को खेत और किसान की वास्तविक समस्याओं से जोड़ने के साथ वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को गांवों तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम हैं।
विधि प्रदर्शन में सेजल सिंह बघेल, शिवांगी द्विवेदी, स्तुति चौरसिया, रीतिका राय, कृतिका वंजारे, संतोषी मरावी, साक्षी सिंह, सलोनी उके, सुनीता प्रजापति, प्रज्ञा पटेल एवं रूपाली सिंह ने सक्रिय सहभागिता की। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को टिकाऊ, जल एवं बीज बचत आधारित धान उत्पादन तकनीकों को खेत स्तर पर अपनाने के लिए प्रेरित करना रहा।
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