ए.के.एस. विश्वविद्यालय के डॉ. सौरभ सिंह गौर को पीएच.डी., औषधीय कवक पर शोध से कैंसररोधी संभावनाओं की पड़तालकॉर्डिसेप्स की विभिन्न प्रजातियों में कॉर्डिसेपिन के उत्पादन और कैंसररोधी प्रभाव का किया तुलनात्मक अध्ययन
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सतना। ए.के.एस. विश्वविद्यालय, सतना के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के शोधार्थी सौरभ सिंह गौर ने औषधीय जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय शोध उपलब्धि हासिल करते हुए पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की है। उन्होंने अपना शोध कार्य प्रो. कमलेश चौरे के मार्गदर्शन में पूर्ण किया। उनका शोध कार्य औषधीय महत्व रखने वाले कॉर्डिसेप्स कवक की विभिन्न प्रजातियों के वैज्ञानिक अध्ययन पर केंद्रित रहा।

डॉ. सौरभ सिंह गौर ने “कॉर्डिसेप्स की विभिन्न प्रजातियों में कॉर्डिसेपिन उत्पादन एवं कैंसररोधी गतिविधि का तुलनात्मक विश्लेषण” विषय पर शोध किया। इस अध्ययन में कॉर्डिसेप्स की विभिन्न प्रजातियों की तुलना करते हुए उनमें पाए जाने वाले कॉर्डिसेपिन के उत्पादन तथा उसकी कैंसररोधी गतिविधियों का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया गया। शोध का उद्देश्य ऐसी प्रजातियों और जैव सक्रिय यौगिकों की पहचान करना था, जिनमें भविष्य में औषधीय अनुसंधान के लिए उपयोगी संभावनाएं देखी जा सकें।
कॉर्डिसेप्स को लंबे समय से औषधीय महत्व वाले कवक के रूप में देखा जाता रहा है। इसके जैव सक्रिय घटकों को लेकर दुनिया भर में अनुसंधान जारी है। इसी संदर्भ में डॉ. सौरभ का तुलनात्मक अध्ययन जैव प्रौद्योगिकी, औषधि अनुसंधान और प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त संभावित उपचारात्मक यौगिकों की खोज की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान प्रस्तुत करता है।
शोध कार्य के दौरान डॉ. सौरभ सिंह गौर ने अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में अनेक शोध-पत्र प्रकाशित किए। उनकी यह उपलब्धि शोध के प्रति निरंतर समर्पण और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को दर्शाती है।
ए.के.एस. विश्वविद्यालय परिवार ने डॉ. सौरभ सिंह गौर को पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त करने पर बधाई देते हुए उनके उत्कृष्ट शोध कार्य, वैज्ञानिक प्रतिबद्धता और शोध के प्रति समर्पण की सराहना की। विश्वविद्यालय परिवार ने उनके उज्ज्वल अकादमिक एवं शोध भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
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