जीएसटी की कसौटी पर होगी फर्म! पंजीयन से स्टॉक रजिस्टर तक खुल सकते हैं कई राज !
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धरमजयगढ़ – ग्राम पंचायत पारेमेर में कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा मामला अब नया मोड़ लेता दिखाई दे रहा है। पंचायत भुगतान और संबंधित वेंडर फर्म के अस्तित्व को लेकर पहले से उठ रहे सवालों के बीच अब शिकायतकर्ता ने पूरे प्रकरण की शिकायत जीएसटी विभाग में भी करने की बात कही है। यदि ऐसा होता है, तो फर्म के जीएसटी पंजीयन, उसकी वैधता, स्टॉक रजिस्टर, कर भुगतान तथा अन्य वैधानिक अभिलेखों की भी जांच का रास्ता खुल सकता है। इससे पूरे मामले में सामने आए दावों और वास्तविक दस्तावेजों का मिलान संभव होगा।
शिकायतकर्ता और कुछ स्थानीय ग्रामीणों का दावा है कि जिस फर्म के नाम पर पंचायत से भुगतान किए जाने का आरोप है, उस फर्म के नाम का पोस्टर-बैनर शिकायत दर्ज होने के बाद ही अचानक एक मकान की दीवार पर दिखाई देने लगा। उनका कहना है कि शिकायत से पहले न तो फर्म का कोई स्पष्ट बोर्ड दिखाई देता था, न दुकान का कोई पहचान चिन्ह और न ही क्षेत्र में उसकी नियमित व्यावसायिक गतिविधि स्पष्ट रूप से नजर आती थी। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इनकी सत्यता सक्षम जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
यदि फर्म पहले से विधिवत संचालित थी, तो उसका स्पष्ट भौतिक अस्तित्व शिकायत से पहले सामने क्यों नहीं आया। उनका यह भी कहना है कि बिना तिथि दर्ज बिलों के आधार पर पंचायत द्वारा भुगतान किए जाने के आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यह स्पष्ट होना चाहिए कि भुगतान किस प्रक्रिया और किन दस्तावेजों के आधार पर स्वीकृत किया गया।
शिकायतकर्ता का कहना है कि अब वे पूरे मामले की शिकायत जीएसटी विभाग से भी करेंगे, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि संबंधित फर्म का जीएसटी पंजीयन किस तिथि से प्रभावी है, फर्म वास्तव में कारोबार कर रही थी या नहीं, उसके स्टॉक रजिस्टर में कौन-कौन सी सामग्री दर्ज है, कर भुगतान का विवरण क्या है तथा वैधानिक अभिलेख नियमों के अनुरूप संधारित किए गए हैं या नहीं। उनका मानना है कि यदि विभागीय जांच होती है, तो उपलब्ध दस्तावेज स्वयं यह स्पष्ट कर देंगे कि वास्तविक स्थिति क्या है।
हालांकि, यह उल्लेखनीय है कि फिलहाल जीएसटी विभाग में शिकायत किए जाने की बात शिकायतकर्ता द्वारा कही गई है और विभाग की ओर से इस संबंध में कोई कार्रवाई या जांच प्रारंभ होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वहीं पंचायत भुगतान और अन्य आरोपों से जुड़ा मामला पहले से प्रशासनिक जांच के अधीन बताया जा रहा है।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासनिक जांच और संभावित जीएसटी जांच में कौन-कौन से तथ्य सामने आते हैं। यदि संबंधित दस्तावेज, पंजीयन, कर अभिलेख और स्टॉक रजिस्टर का परीक्षण होता है, तो पूरे मामले में लगाए गए आरोपों और वास्तविक अभिलेखों के बीच का अंतर स्पष्ट हो सकता है। अंतिम निष्कर्ष सक्षम जांच प्राधिकारी और संबंधित विभागों की रिपोर्ट के आधार पर ही तय होगा।
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