खनन: विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन का वैश्विक संकल्प; भूगर्भशास्त्री शीलेन्द्र उपाध्याय बोले— ‘उत्तरदायी खनन ही मानव जाति और पृथ्वी के भविष्य का एकमात्र विकल्प’
1 min read
सतना : खनन विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन का वैश्विक संकल्प मानव जाति, प्रकृति और पृथ्वी के भविष्य के लिए उत्तरदायी खनन ही एकमात्र विकल्प शीलेन्द्र उपाध्याय, भूगर्भशास्त्री एवं खनन विशेषज्ञ मानव सभ्यता की प्रगति पृथ्वी की गोद में छिपी खनिज संपदा के कारण संभव हो सकी है। ऊर्जा, अधोसंरचना, चिकित्सा, परिवहन, रक्षा, अंतरिक्ष विज्ञान और आधुनिक तकनीक का आधार खनिज संसाधन हैं।

शीलेन्द्र उपाध्याय ने बताया कि आज पूरी दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती विकास की गति को बनाए रखते हुए पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना है। उनके अनुसार इसका एकमात्र समाधान उत्तरदायी एवं सतत खनन है।शीलेन्द्र उपाध्याय ने बताया कि खनन केवल खनिज निकालने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि प्रकृति, समाज और आने वाली पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी का विषय भी है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक खनन परियोजना में वृक्षारोपण, वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, प्रदूषण नियंत्रण, जैव विविधता संरक्षण तथा खदानों के वैज्ञानिक पुनर्वास को अनिवार्य रूप से अपनाया जाना चाहिए। इससे विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित किया जा सकता है। शीलेन्द्र उपाध्याय ने बताया कि आधुनिक तकनीकों जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ड्रोन सर्वेक्षण, रिमोट सेंसिंग और भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी के माध्यम से खनन को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और पर्यावरण-अनुकूल बनाया जा सकता है। उनका कहना है कि वैज्ञानिक सोच और नवाचार ही भविष्य के खनन उद्योग को नई दिशा देंगे। पर्यावरण संरक्षण और उत्तरदायी खनन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए शीलेन्द्र उपाध्याय को यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। शीलेन्द्र उपाध्याय ने बताया कि पृथ्वी केवल वर्तमान पीढ़ी की धरोहर नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की अमानत है। इसलिए प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग संवेदनशीलता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और उत्तरदायित्व के साथ किया जाना चाहिए।
शीलेन्द्र उपाध्याय ने बताया कि यदि विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को समान प्राथमिकता दी जाए, तो खनन मानव कल्याण का सबसे बड़ा माध्यम बन सकता है। उन्होंने कहा कि सच्चा विकास वही है, जो आर्थिक समृद्धि के साथ प्रकृति का संतुलन बनाए रखे और मानवता को सुरक्षित भविष्य प्रदान करे। अपने संदेश के अंत में शीलेन्द्र उपाध्याय ने बताया, “प्रकृति से उतना ही लें, जितना उसे लौटाने का संकल्प हमारे भीतर हो। यही उत्तरदायी खनन है, यही सतत विकास है और यही मानव सभ्यता के सुरक्षित भविष्य की आधारशिला है।”
Subscribe to my channel