भारतमाला परियोजना से प्रभावित 28 पुनर्वासित परिवारों ने एसडीएम को सौंपा आपत्ति एवं अभ्यावेदन, 1956-57 में बसाई गई आबादी के अधिग्रहण पर उठाया मुद्दा !
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धरमजयगढ़ – भारतमाला परियोजना अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 130 के उरगा-पत्थलगांव खंड के लिए भूमि एवं आबादी क्षेत्र के अधिग्रहण की प्रक्रिया के बीच बायसी कॉलोनी क्षेत्र के प्रभावित परिवारों ने उचित एवं वैधानिक मुआवजे की मांग उठाई है। प्रभावित ग्रामीणों की ओर से अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), धरमजयगढ़ को दिए गए अभ्यावेदन में केवल मकान निर्माण का मुआवजा दिए जाने के बजाय सोलैसियम, अन्य वैधानिक लाभ तथा नवीनतम गाइडलाइन/बाजार दर के आधार पर मुआवजा निर्धारित करने की मांग की गई है।

अभ्यावेदन के अनुसार ग्राम पंचायत बायसी कॉलोनी क्षेत्र की एक आबादी बस्ती, खसरा नंबर 240 में लगभग 28 परिवारों को वर्ष 1956-57 के दौरान पुनर्वासित किए जाने की बात कही गई है। ग्रामीणों का कहना है कि कई पीढ़ियों से परिवार इसी आबादी में निवास करते आ रहे हैं और अब राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना के लिए उनके मकान, भूमि एवं अन्य संपत्तियां अधिग्रहण की प्रक्रिया से प्रभावित हो रही हैं।
सिर्फ मकान का मुआवजा देने पर आपत्ति
प्रभावित परिवारों का कहना है कि अधिग्रहण की कार्रवाई में यदि केवल मकान निर्माण का सामान्य मुआवजा निर्धारित किया जाता है, तो इससे उन परिवारों को मिलने वाले अन्य वैधानिक लाभ प्रभावित हो सकते हैं। अभ्यावेदन में प्रत्येक मकान, निर्माण, वृक्ष, स्थायी संपत्ति तथा उससे संबंधित वैधानिक देयताओं का स्वतंत्र एवं निष्पक्ष मूल्यांकन कराने की मांग की गई है।
परिवारों ने यह भी कहा है कि मकानों के अधिग्रहण के कारण यदि वे विस्थापित होते हैं तो उनके पुनर्वास की समुचित व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
10 परिवारों के मकान-पेड़ भी अधिग्रहण की कार्रवाई में
अभ्यावेदन में 28 परिवारों में से प्रभावित बताए गए परिवारों के नाम भी दर्ज किए गए हैं। इनमें अमल मंडल, मनमोहन मंडल, अनाथ ढाली, सुनील मंडल, सत्यानन्द राय, शांति हालदार, निमाई हालदार, कुमारेश सरकार, ठाकुर राय सहित अन्य परिवार शामिल हैं। दस्तावेज में संबंधित मकानों एवं पेड़-पौधों के अधिग्रहण की कार्रवाई का उल्लेख किया गया है।
भूमिस्वामियों की जमीन का भी मुद्दा
अभ्यावेदन में पांच अन्य भूमिस्वामियों की जमीन भी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना के लिए अधिग्रहण की कार्रवाई में शामिल होने का उल्लेख किया गया है। इनमें सुनील राय—खसरा नंबर 224/2, सुनील मंडल—खसरा नंबर 241/1, रवींद्र मंडल—खसरा नंबर 241/2, कुशों साना—खसरा नंबर 242/3 तथा परिमल साना का नाम दर्ज है। इन भूमिस्वामियों की भूमि का भी उचित मूल्यांकन कर लागू कानून एवं वैधानिक दरों के अनुसार मुआवजा निर्धारित करने की मांग की गई है।
20 फरवरी 2026 की नई गाइडलाइन दर का भी हवाला
ग्रामीणों ने अपने अभ्यावेदन में 20 फरवरी 2026 से लागू भूमि एवं संपत्ति की नवीन गाइडलाइन दर तथा सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की 24 जून 2026 की अधिसूचना का भी संदर्भ दिया है। उनका आग्रह है कि मुआवजा निर्धारण में लागू नवीनतम दरों और अधिग्रहण से जुड़े सभी वैधानिक प्रावधानों को ध्यान में रखा जाए।
इस पूरे मामले ने भारतमाला परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण के साथ-साथ दशकों पहले पुनर्वासित की गई आबादी के वर्तमान अधिकार, मुआवजा और पुनर्वास के मुद्दे को भी सामने ला दिया है। अब देखना होगा कि राजस्व प्रशासन प्रभावित परिवारों की आपत्तियों और दस्तावेज में दर्ज दावों की जांच के बाद मुआवजा एवं पुनर्वास के संबंध में क्या कार्रवाई करता है।
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