भारतमाला आर.ओ.डब्ल्यू. अनियमितता की जांच शुरू ! मंदिर की संपत्तियों, वन अधिकार पट्टा और वन संपदा को नुकसान पहुंचाने के आरोपों की खुलेंगी परतें !
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धरमजयगढ़। भारतमाला परियोजना के अंतर्गत उरगा–पत्थलगांव राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण में धरमजयगढ़ क्षेत्र के सिसरिंगा घाट से जुड़ा राइट ऑफ वे (आर.ओ.डब्ल्यू.) अनियमितता का मामला अब गंभीर जांच के दायरे में आ गया है। सड़क निर्माण के दौरान निर्धारित सीमा से बाहर जाकर मंदिर की संपत्तियों, वन संपदा और वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) के तहत प्राप्त भूमि को नुकसान पहुंचाने के आरोपों पर वन विभाग की जांच टीम ने मौके पर पहुंचकर प्रभावित पक्षों के बयान दर्ज किए हैं। प्रारंभिक जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने की जानकारी मिली है।

मीडिया खुलासे के बाद हरकत में आया वन विभाग-

मामले के सार्वजनिक होने के बाद धरमजयगढ़ वनमंडलाधिकारी (डीएफओ) ने तत्काल संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए। जांच दल ने घटनास्थल का निरीक्षण किया तथा प्रभावित ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और संबंधित व्यक्तियों के बयान दर्ज किए। सूत्रों के अनुसार, बयानों में यह आरोप सामने आया है कि निर्माण एजेंसी ने ब्लास्टिंग की आवश्यकता का हवाला देकर निर्धारित आर.ओ.डब्ल्यू. सीमा से बाहर भी हस्तक्षेप किया, जिससे बड़ी संख्या में पेड़, मंदिर परिसर की संपत्तियां और अन्य संरचनाएं प्रभावित हुईं।

एफआरए पट्टाधारी ने लगाए मकान तोड़े जाने के आरोप –

बंजारी मंदिर के पुजारी एवं वन अधिकार अधिनियम के तहत पट्टाधारी नरसिंह ने जांच अधिकारियों को दिए अपने बयान में आरोप लगाया कि उनकी एफआरए भूमि पर बने मकान (होटल) को सड़क निर्माण के दौरान जेसीबी से ध्वस्त कर दिया गया। उनका यह भी कहना है कि उन्हें इस नुकसान का कोई मुआवजा नहीं मिला। जांच दल ने संबंधित भूमि, पट्टा अभिलेख और क्षति से जुड़े दस्तावेज अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।
क्या हाई-टेंशन टॉवर बचाने के लिए बदला गया सड़क का एलाइनमेंट?
मामले में सबसे गंभीर सवाल सड़क के एलाइनमेंट को लेकर उठ रहे हैं। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि जिस स्थान पर आर.ओ.डब्ल्यू. से बाहर निर्माण संबंधी गतिविधियों के आरोप लगे हैं, उसके ठीक विपरीत दिशा में सड़क किनारे एक हाई-टेंशन विद्युत टॉवर स्थित है। आरोप है कि टॉवर को स्थानांतरित करने में आने वाले भारी खर्च और समय से बचने के लिए सड़क का एलाइनमेंट दूसरी ओर मोड़ा गया, जिससे आर.ओ.डब्ल्यू. सीमा से बाहर वन भूमि, मंदिर परिसर और एफआरए पट्टा भूमि प्रभावित हुई। हालांकि इस संबंध में जांच एजेंसी की आधिकारिक रिपोर्ट अभी आना बाकी है।
सार्वजनिक संपत्तियों के पुनर्निर्माण की मांग –

ग्राम पंचायत सिसरिंगा के सरपंच सहित अनेक ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने जांच दल के समक्ष अपने बयान दर्ज कराते हुए मांग की है कि सड़क निर्माण के दौरान क्षतिग्रस्त किए गए सार्वजनिक शौचालय, प्रतीक्षालय, कुएं तथा अन्य सामुदायिक संपत्तियों का पुनर्निर्माण कराया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्धारित सीमा से बाहर कार्रवाई हुई है तो जिम्मेदार पक्षों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

सिसरिंगा घाट का यह मामला अब केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं रह गया है। इसमें वन संरक्षण, धार्मिक आस्था, वन अधिकार अधिनियम, सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा और परियोजना क्रियान्वयन की वैधानिक प्रक्रिया जैसे कई गंभीर प्रश्न जुड़ गए हैं। वन विभाग की जांच रिपोर्ट तय करेगी कि क्या वास्तव में आर.ओ.डब्ल्यू. सीमा का उल्लंघन हुआ, क्या निर्माण कार्य नियमानुसार किया गया और यदि अनियमितताएं पाई जाती हैं तो संबंधित निर्माण एजेंसी एवं जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की जाएगी। क्षेत्र के लोगों की निगाहें अब इसी रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं। राइट ऑफ़ वे मामले के खुलासे के साथ ही यह भी संभावना जताई जा रही है कि आगामी दिनों में परियोजना me कई और अनियमितताओं की परतें खुल सकती हैं ,क्षेत्र के लोगों की निगाहें अब इसी पर टिकी हुई हैं।
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