9 करोड़ टन कोयले का शेरबंद खनन क्षेत्र… लेकिन सच अब भी फाइलों में? धरमजयगढ़ की बड़ी कोयला परियोजना में परदे के पीछे क्या चल रहा है ?
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धरमजयगढ़ – रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ क्षेत्र में प्रस्तावित शेरबंद कोयला खनन क्षेत्र एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। भारत सरकार के कोयला मंत्रालय के अनुसार वर्ष 2023 की सातवीं वाणिज्यिक कोयला खदान नीलामी में लगभग 9 करोड़ टन भूवैज्ञानिक कोयला भंडार वाले इस खनन क्षेत्र का आवंटन नीलकंठ कोल माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड को किया गया। उपलब्ध मंत्रालयी अभिलेखों में यह भी दर्ज है कि पूर्वेक्षण अनुज्ञप्ति-सह-खनन पट्टा (पीएल-सह-एमएल) प्रदान किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ी थी।
यहीं से कई महत्वपूर्ण प्रश्न सामने आते हैं। मंत्रालय की समीक्षा में यह उल्लेख मिलता है कि खनन पट्टे के निष्पादन की प्रक्रिया उस समय लंबित थी और कंपनी की ओर से भूवैज्ञानिक ड्रिलिंग तथा अन्य अन्वेषण कार्य पट्टा निष्पादित होने के बाद प्रारंभ किए जाने का उल्लेख किया गया था। ऐसे में अब यह जानना महत्वपूर्ण है कि क्या खनन पट्टे का निष्पादन पूरा हो चुका है, यदि हो चुका है तो कब हुआ और यदि नहीं हुआ तो परियोजना वर्तमान में किस चरण में है।
शेरबंद कोयला खनन क्षेत्र को धरमजयगढ़ की महत्वपूर्ण प्रस्तावित परियोजनाओं में माना जा रहा है। यदि यह परियोजना सभी आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियाँ प्राप्त कर उत्पादन तक पहुँचती है तो इसका प्रभाव क्षेत्र की अर्थव्यवस्था, सड़क और रेल परिवहन, औद्योगिक गतिविधियों तथा रोजगार पर पड़ सकता है। दूसरी ओर वन, पर्यावरण, जल स्रोतों और स्थानीय समुदायों से जुड़े अधिकारों की रक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी।
सबसे बड़ा प्रश्न पारदर्शिता का है। इतनी महत्वपूर्ण परियोजना से जुड़े अद्यतन अभिलेख, खनन पट्टे की वर्तमान स्थिति, आधिकारिक मानचित्र, प्रभावित ग्रामों का विवरण तथा वैधानिक कार्यवाही यदि सार्वजनिक रूप से सरलता से उपलब्ध कराई जाए तो स्थानीय लोगों के मन में उठ रहे अनेक प्रश्न स्वतः समाप्त हो सकते हैं। वर्तमान में विभिन्न सरकारी स्रोतों में उपलब्ध जानकारी बिखरी हुई दिखाई देती है, जिससे परियोजना की वास्तविक स्थिति का समग्र चित्र आम नागरिकों के सामने नहीं आ पाता।
धरमजयगढ़ पहले ही अनेक कोयला परियोजनाओं के कारण राज्य और देश के स्तर पर चर्चा में है। ऐसे में शेरबंद कोयला खनन क्षेत्र केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि विकास, पर्यावरण संरक्षण और प्रशासनिक पारदर्शिता की भी परीक्षा बनता जा रहा है। अब सबकी निगाह इस बात पर है कि संबंधित विभाग इस परियोजना की अद्यतन स्थिति और उससे जुड़े अभिलेखों को किस प्रकार सार्वजनिक करते हैं, ताकि विकास के साथ जनता का विश्वास भी उतना ही मजबूत बना रहे।
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