शेरबंद कोल ब्लॉक: आधिकारिक रिकॉर्ड में गड़बड़ी या परियोजना की हकीकत पर पर्दा ?
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धरमजयगढ़ – रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ क्षेत्र में प्रस्तावित शेरबंद कोल ब्लॉक को लेकर सामने आए आधिकारिक दस्तावेजों ने परियोजना की प्रगति पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दस्तावेज बताते हैं कि यह कोल ब्लॉक 14 दिसंबर 2023 को एम/एस नीलकंठ कोल माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड को आवंटित किया गया था तथा इसका व्यावसायिक संचालन 14 जून 2029 तक शुरू करने का लक्ष्य निर्धारित है। हालांकि, आवंटन के डेढ़ वर्ष से अधिक समय बाद भी परियोजना अभी केवल अन्वेषण (एक्सप्लोरेशन) के चरण में है और खनन शुरू होने से पहले की मूलभूत प्रक्रियाएं ही पूरी नहीं हो सकी हैं।
दस्तावेजों के अनुसार कंपनी को 1 अक्टूबर 2024 को संयुक्त प्रॉस्पेक्टिंग लाइसेंस एवं खनन पट्टा (पीएल कम एमएल) प्रदान किया गया, जबकि वन क्षेत्र में ड्रिलिंग की अनुमति के लिए आवश्यक अनापत्ति प्रमाण-पत्र 11 जुलाई 2024 को ही प्राप्त हो गया था। वहीं कंपनी का कहना है कि उसे पट्टा विलेख 24 दिसंबर 2024 को जिला प्रशासन रायगढ़ से प्राप्त हुआ, जिसके बाद 25 दिसंबर 2025 से ड्रिलिंग कार्य प्रारंभ किया गया। कंपनी के अनुसार शुरुआती दो सप्ताह में केवल 300 मीटर ड्रिलिंग पूरी की गई, जबकि अनिवार्य कार्य कार्यक्रम के तहत 1360 मीटर ड्रिलिंग करना आवश्यक है।
कंपनी ने दावा किया है कि शेष 1060 मीटर ड्रिलिंग एक माह में पूरी कर ली जाएगी और उसके बाद कोर नमूनों का परीक्षण कर भू-वैज्ञानिक प्रतिवेदन (जीआर) तैयार किया जाएगा। लेकिन यहीं सबसे बड़ा विरोधाभास सामने आता है। दस्तावेज में उल्लेख है कि भू-वैज्ञानिक प्रतिवेदन मार्च 2025 तक प्रस्तुत कर दिया जाएगा, जबकि उसी दस्तावेज में ड्रिलिंग शुरू होने की तिथि 25 दिसंबर 2025 लिखी गई है। अर्थात जिस रिपोर्ट को मार्च 2025 तक प्रस्तुत करने की बात कही गई है, उसकी आधारभूत ड्रिलिंग ही दिसंबर 2025 में शुरू होना दर्शाया गया है। यह कालक्रम तथ्यात्मक रूप से मेल नहीं खाता और दस्तावेज की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
यह विरोधाभास केवल टंकण त्रुटि है या फिर परियोजना की प्रगति संबंधी अभिलेखों में गंभीर लापरवाही हुई है, यह जांच का विषय है। यदि यह किसी उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक का आधिकारिक अभिलेख है, तो संबंधित विभागों और कंपनी को इस विसंगति पर सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण देना चाहिए।
खनन परियोजनाओं में समयबद्ध अन्वेषण, पारदर्शी अभिलेख और सही प्रगति विवरण अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में शेरबंद कोल ब्लॉक से जुड़े इन दस्तावेजों में सामने आया यह विरोधाभास परियोजना की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है। यदि आगे भी ऐसे दस्तावेज सामने आते हैं, तो यह मामला विस्तृत प्रशासनिक जांच का विषय बन सकता है।
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