चित्रकूट ने रचा योग का अनूठा मॉडल : 111 केंद्रों से पहुंचे साधक, ग्रामोदय विश्वविद्यालय में हुआ विराट सामूहिक योग आयोजनसंतों, समाजसेवियों, शिक्षण संस्थाओं और जनसमुदाय की सहभागिता से साकार हुआ चित्रकूट की एकात्मता का अद्भुत स्वरूपएमपी-यूपी सांस्कृतिक एकात्मता और सप्ताहभर चले जन-अभियान की ऊर्जा से ग्रामोदय कैंपस हुआ उत्साहित
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चित्रकूट- 21 जून 2026। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 के अवसर पर महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित सामूहिक योग कार्यक्रम केवल एक योग आयोजन नहीं, बल्कि चित्रकूट की सांस्कृतिक एकात्मता, सामाजिक समरसता और जनभागीदारी का अद्वितीय उत्सव बन गया। मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के सीमावर्ती चित्रकूट क्षेत्र के 111 योग केंद्रों से पहुंचे एक हजार से अधिक महिला-पुरुष योग साधकों ने एक साथ योगाभ्यास कर चित्रकूट मॉडल की विशिष्ट पहचान को सशक्त रूप से प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ संत समाज की गरिमामयी उपस्थिति में दीनदयाल शोध संस्थान के राष्ट्रीय संगठन सचिव श्री अभय महाजन, महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. आलोक चौबे, संतोषी अखाड़ा के महंत श्री रामजी दास, भरत मंदिर के महंत श्री दिव्यजीवन दास, कामतानाथ प्रथम मुखारविंद के डॉ. मदन गोपाल दास, गायत्री शक्तिपीठ के संचालक डॉ. रामनारायण त्रिपाठी, महंत श्री सीताशरण जी महाराज एवं महंत श्री गोविन्द दास जी महाराज द्वारा भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।
इस अवसर पर अपने आशीर्वचन में महंत श्री रामजी दास ने कहा कि योग मानव को सुख, शांति और सौहार्द की दिशा में अग्रसर करता है। यह ऋषि-मुनियों की अमूल्य धरोहर है, जिसका उल्लेख हमारे प्राचीन आर्ष ग्रंथों में मिलता है। उन्होंने योग को जीवन का अभिन्न अंग बनाने का आह्वान किया।

दीनदयाल शोध संस्थान के राष्ट्रीय संगठन सचिव श्री अभय महाजन ने कहा कि योग का वास्तविक अर्थ है—जोड़ना। चित्रकूट का यह आयोजन उसी भावना का सजीव उदाहरण है। कभी चित्रकूट एक सांस्कृतिक क्षेत्र था, जहां प्रशासनिक सीमाओं का कोई महत्व नहीं था। आज पुनः वही भाव साकार होता दिखाई दे रहा है, जब मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के 111 केंद्रों के योगाभ्यासी एक साथ योग साधना के लिए एक मंच पर एकत्र हुए हैं।

महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. आलोक चौबे ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रयासों से योग को वैश्विक पहचान मिली है और आज पूरा विश्व योग दिवस मना रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री मोदी को युगपुरुष की संज्ञा देते हुए कहा कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस केवल एक दिवस का आयोजन न रहकर वर्ष के 365 दिनों की जीवनशैली बनना चाहिए।

कार्यक्रम के उद्घोषक प्रो. ललित कुमार सिंह रहे। योग सत्र का संचालन प्रख्यात योग प्रशिक्षक डॉ. तुषारकांत शास्त्री के निर्देशन में हुआ। डॉ. शास्त्री ने संधि संचालन, योगासन, संकल्प एवं कल्याण मंत्र की गतिविधियां संपन्न कराईं। वीरेंद्र रिछारिया एवं दशरथ ने क्रमशः सूर्य नमस्कार और प्राणायाम का अभ्यास कराया। वागीश दत्त त्रिवेदी, अरुण, आदर्श, आर्यन, आदित्य, नवीन, दिव्यांशी पाण्डेय एवं मोनिका सहित अनेक स्वयंसेवक अग्रेसर की भूमिका में रहे। कार्यक्रम का संयोजन प्रो. एस. के. चतुर्वेदी ने किया तथा आभार प्रदर्शन ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. आञ्जनेय पाण्डेय ने किया।

इस आयोजन को आयुष मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रोत्साहित किया गया। कार्यक्रम संयोजक प्रो. एस. के. चतुर्वेदी ने बताया कि केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्री प्रतापराव जाधव द्वारा प्रेषित “योग संगम” प्रमाण-पत्र के अनुसार महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में लगभग एक हजार प्रतिभागियों ने सहभागिता की। यह आयोजन कोलकाता, पश्चिम बंगाल में माननीय प्रधानमंत्री के नेतृत्व में आयोजित राष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम के अनुरूप एवं समान समय पर सम्पन्न हुआ।
चित्रकूट क्षेत्र के 12 संकुलों से आए योग साधकों ने इस आयोजन को व्यापक जनभागीदारी का स्वरूप प्रदान किया। इस आयोजन की विशेषता यह रही कि इसके पूर्व 111 योग केंद्रों पर एक सप्ताह तक नियमित योगाभ्यास कराया गया, जिसके बाद सभी साधक एक स्थान पर एकत्रित हुए।
ॐ के उच्चारण, वैदिक मंत्रोच्चार एवं “ॐ संगच्छध्वं संवदध्वं” की प्रार्थना के साथ प्रारंभ हुए योगाभ्यास में संधि संचालन, योगासन, सूर्य नमस्कार, प्राणायाम, ध्यान, संकल्प तथा “सर्वे भवन्तु सुखिनः” के कल्याण मंत्र का सामूहिक उच्चारण किया गया। संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा, अनुशासन और सकारात्मक चेतना से अनुप्राणित रहा।

इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की थीम “स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग” रही, जिसके अनुरूप कार्यक्रम में योग को स्वस्थ, सक्रिय और संतुलित जीवन का आधार बताया गया।
कार्यक्रम में नगर पंचायत चित्रकूट की अध्यक्ष साधना पटेल, तहसीलदार मझगवां श्री भदौरिया, सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट के राजेन्द्र प्रसाद मिश्र, सुभील, शिवाकांत, भाजपा जिला उपाध्यक्ष प्रवल राव, दीनदयाल शोध संस्थान के डॉ. अनिल जायसवाल, अपराजित शुक्ला, ग्रामोदय विश्वविद्यालय के संकायाध्यक्षों , प्राध्यापकों, शिक्षकों, कर्मचारियों सहित अनेक गणमान्य नागरिक, शिक्षाविद, जनप्रतिनिधि, शिक्षक, कर्मचारी, छात्र छात्राएं एवं योग प्रेमी उपस्थित रहे।

उल्लेखनीय है कि यह कार्यक्रम पूज्य संत-महात्माओं, महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय, दीनदयाल शोध संस्थान, सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट, नगर पंचायत, सामाजिक एवं शैक्षणिक संस्थाओं, स्थानीय निकायों, प्रशासन तथा चित्रकूट के नागरिकों के संयुक्त सहयोग से आयोजित किया गया।

इस वर्ष के अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की तैयारी के लिए दीनदयाल शोध संस्थान के आरोग्यधाम में 11 से 13 जून तक लगभग 200 योग प्रशिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया। इसके उपरांत 14 से 20 जून तक चित्रकूट क्षेत्र के 111 स्थानों पर 200 से अधिक प्रशिक्षकों द्वारा नियमित योगाभ्यास कराया गया। इस प्रकार चित्रकूट ने योग दिवस को केवल एक दिन का आयोजन न बनाकर जन-जागरण, जन-स्वास्थ्य और सामाजिक एकात्मता के सप्ताहव्यापी अभियान में परिवर्तित कर दिया।
चित्रकूट का यह जन-आंदोलन आधारित योग मॉडल देशभर के लिए प्रेरणा का विषय बन सकता है। यहां संत समाज, सामाजिक संस्थाएं, शैक्षणिक परिसर, ग्राम समुदाय और नगरवासी एक साथ मिलकर योग को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। यही इस आयोजन की सबसे बड़ी उपलब्धि तथा इसकी विशिष्ट पहचान है।


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