टंकी बनी, नल लगे, फिर भी प्यासे ग्रामीण! शिकायत पर विभाग ने झाड़ा पल्ला, पंचायत पर डाली जिम्मेदारी
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धरमजयगढ़ – सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना के तहत गांवों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कई जगह इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। ऐसा ही एक मामला धरमजयगढ़ क्षेत्र के ग्राम आमापाली से सामने आया है, जहां ग्रामीणों ने पानी टंकी निर्माण और घर-घर नल कनेक्शन लगने के बावजूद पानी नहीं मिलने की शिकायत सीधे कलेक्टर जनदर्शन में दर्ज कराई।
ग्रामीणों द्वारा प्रस्तुत शिकायत के अनुसार गांव में पानी टंकी का निर्माण काफी समय पहले पूरा हो चुका है और अधिकांश घरों में नल कनेक्शन भी लगाए जा चुके हैं, लेकिन नलों से पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस संबंध में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों से कई बार संपर्क किया गया और आश्वासन भी मिला कि जल्द पानी चालू कर दिया जाएगा, लेकिन लंबे समय तक समस्या जस की तस बनी रही। लगातार परेशानी झेल रहे ग्रामीणों ने अंततः कलेक्टर से हस्तक्षेप की मांग की।
मामले में दिलचस्प मोड़ तब आया जब शिकायत पर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने अपना जवाब प्रस्तुत किया। विभाग ने लिखित पत्र में दावा किया कि ग्राम आमापाली में जल जीवन मिशन अंतर्गत स्वीकृत योजना के सभी कार्य पूर्ण किए जा चुके हैं तथा अगस्त 2025 में पूरी योजना ग्राम पंचायत को हस्तांतरित कर दी गई थी। विभाग के अनुसार योजना के तहत जल प्रदाय भी प्रारंभ कर दिया गया था और उसके बाद संचालन एवं रखरखाव की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत की है।
यहीं सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है। यदि विभाग के अनुसार योजना पूर्ण होकर पंचायत को सौंप दी गई थी और जलापूर्ति शुरू हो चुकी थी, तो फिर ग्रामीण फरवरी 2026 में पानी नहीं मिलने की शिकायत करने को मजबूर क्यों हुए? आखिर जमीनी स्तर पर ऐसी कौन सी स्थिति बनी कि ग्रामीणों को कलेक्टर कार्यालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा?
यह मामला अब केवल पानी की समस्या तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि योजना के वास्तविक संचालन, रखरखाव और जवाबदेही पर भी प्रश्नचिह्न खड़े कर रहा है। एक ओर विभाग योजना को पूर्ण और चालू बता रहा है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण खुद को पेयजल संकट से जूझता बता रहे हैं। ऐसे में आवश्यकता इस बात की है कि संबंधित प्रशासनिक अधिकारी मौके पर जांच कर यह स्पष्ट करें कि आखिर योजना के पूर्ण होने के दावों और ग्रामीणों की शिकायतों में से सच्चाई किस पक्ष के साथ है।
जब करोड़ों रुपये की योजनाओं का उद्देश्य अंतिम व्यक्ति तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना है, तब टंकी बनने और नल लगने के बाद भी पानी का न पहुंचना व्यवस्था की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब ग्रामीणों की निगाहें प्रशासन की कार्रवाई और वास्तविक समाधान पर टिकी हुई हैं।
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