रिहायशी इलाकों पर ड्रोन की उड़ान ! धरमजयगढ़ में बिना जानकारी उड़ान पर भड़के लोग, ग्रामीणों ने पूछा— किसका आदेश और जवाबदेही किसकी?”
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आपत्ति के बाद रुका ड्रोन सर्वे, लेकिन उठे सवाल अब भी हवा में! निजता, सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर ग्रामीणों में संशय की स्थिति

धरमजयगढ़ क्षेत्र के रिहायशी इलाकों शाहपुर, दुर्गापुर और धरमजयगढ़ कॉलोनी के ऊपर उड़ाए गए ड्रोन को लेकर अब सवालों का सिलसिला तेज हो गया है। स्थानीय लोगों की आपत्ति और शिकायत के बाद फिलहाल ड्रोन सर्वे की गतिविधियां थम गई हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी वहीं खड़ा है कि आखिर आबादी वाले क्षेत्रों में ड्रोन उड़ाने की अनुमति किसने दी थी? ड्रोन संचालन करने वाली एजेंसी कौन थी? सर्वे का उद्देश्य क्या था और इस पूरी प्रक्रिया की जवाबदेही आखिर किसकी है?
लोगों का कहना है कि विकास कार्यों और परियोजनाओं के लिए तकनीक का उपयोग गलत नहीं है, लेकिन जब किसी रिहायशी क्षेत्र के ऊपर ड्रोन उड़ाया जाता है तो नागरिकों को इसकी जानकारी देना और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी रखना जरूरी है। घरों, निजी परिसरों और लोगों की गतिविधियों की हवाई रिकॉर्डिंग से जुड़े निजता के सवालों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि यदि यह ड्रोन सर्वे किसी सरकारी परियोजना, खनन गतिविधि, भूमि सर्वेक्षण या अधोसंरचना विकास से जुड़ा था तो इसकी पूर्व सूचना क्यों नहीं दी गई? किस विभाग या संस्था के निर्देश पर यह सर्वे कराया जा रहा था? ड्रोन से प्राप्त तस्वीरों और आंकड़ों का उपयोग कहां किया जाएगा और उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन उठाएगा?
ड्रोन सर्वे के लिए जरूरी हैं वैधानिक अनुमति और प्रक्रिया
भारत में ड्रोन संचालन के लिए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के निर्धारित नियमों का पालन करना अनिवार्य है। ड्रोन का पंजीकरण, पहचान संख्या, अधिकृत संचालक और क्षेत्र विशेष में उड़ान की अनुमति जैसी प्रक्रियाएं पूरी करना आवश्यक होता है। प्रतिबंधित या संवेदनशील क्षेत्रों में ड्रोन उड़ाने के लिए विशेष अनुमति की आवश्यकता हो सकती है।
किसी परियोजना के लिए ड्रोन सर्वे करते समय संबंधित विभागीय अनुमति, सर्वे का स्पष्ट उद्देश्य, अधिकृत एजेंसी की जानकारी और प्रभावित क्षेत्र के लोगों के हितों का ध्यान रखना जरूरी है। खासकर रिहायशी इलाकों में ड्रोन से फोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग करते समय नागरिकों की निजता का संरक्षण महत्वपूर्ण जिम्मेदारी बन जाती है।
आपत्ति के बाद रुका सर्वे, लेकिन जवाब का इंतजार
हालांकि स्थानीय लोगों की आपत्ति के बाद फिलहाल ड्रोन सर्वे बंद हो गया है, लेकिन लोगों का कहना है कि केवल सर्वे रोक देना पर्याप्त नहीं है। असली सवाल अब भी कायम हैं। आखिर किसके आदेश पर ड्रोन उड़ाया गया? क्या संबंधित एजेंसी के पास सभी आवश्यक अनुमतियां थीं? क्या स्थानीय प्रशासन को इसकी जानकारी थी? और यदि कोई तकनीकी या कानूनी त्रुटि हुई है तो इसकी जिम्मेदारी कौन तय करेगा?
धरमजयगढ़ क्षेत्र में बढ़ती औद्योगिक गतिविधियों और प्रस्तावित परियोजनाओं के बीच ड्रोन सर्वे को लेकर उठे सवाल अब केवल एक उड़ान तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि यह पारदर्शिता, नागरिक अधिकार और प्रशासनिक जवाबदेही का मुद्दा बन चुके हैं।
ड्रोन की उड़ान भले ही फिलहाल थम गई हो, लेकिन उससे उठे सवाल अभी भी आसमान में मंडरा रहे हैं। अब प्रशासन और संबंधित एजेंसी को स्पष्ट करना होगा कि यह सर्वे किस उद्देश्य से कराया गया था और पूरी प्रक्रिया में नियमों का कितना पालन हुआ।
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