कार्रवाई के बाद बदला ठिकाना, नहीं बदली मंशा! माण्ड नदी में बेखौफ जारी अवैध रेत उत्खनन
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धरमजयगढ़ – माण्ड नदी में अवैध रेत उत्खनन का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्रशासनिक कार्रवाई के बावजूद रेत माफिया लगातार नए-नए ठिकाने तलाशकर अवैध कारोबार को अंजाम दे रहे हैं। कहीं ना कहीं जिम्मेदार विभागों की उदासीनता और कमजोर निगरानी के कारण अवैध उत्खननकर्ताओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे बेखौफ होकर नदी की कोख से रेत निकालने में जुटे हुए हैं।

हाल ही में केराकोना क्षेत्र में हुई कार्रवाई के बाद यह माना जा रहा था कि अवैध खनन पर अंकुश लगेगा, लेकिन स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार कार्रवाई के बाद रेत कारोबारियों ने अपना ठिकाना बदल लिया है और अब आमादरहा एनीकट के आसपास अवैध उत्खनन का नया केंद्र सक्रिय हो गया है। यहां प्रतिदिन रेत निकासी की गतिविधियां देखी जा रही हैं, जिससे प्रशासनिक निगरानी पर भी सवाल उठने लगे हैं।

बताया जाता है कि खनन क्षेत्र पर अपना एकाधिकार बनाए रखने के लिए कुछ लोगों द्वारा अन्य ट्रैक्टरों की आवाजाही रोकने हेतु रास्तों पर बड़े-बड़े पत्थर रखकर मार्ग तक अवरुद्ध कर दिया जाता है।

चिंता की बात यह है कि अधिकांश अवैध उत्खनन पुल-पुलियों, एनीकटों और संवेदनशील नदी तटों के आसपास किया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे क्षेत्रों में अनियंत्रित रेत खनन से नदी की प्राकृतिक संरचना प्रभावित होती है, तट कटाव बढ़ता है तथा पुल-पुलियों और एनीकट जैसी सार्वजनिक संरचनाओं की सुरक्षा पर भी खतरा उत्पन्न हो सकता है। इसके साथ ही जल संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन पर भी दीर्घकालिक प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बनी रहती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक खनन स्थलों पर लगातार निगरानी, नियमित जांच और कठोर दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी, तब तक रेत माफिया एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाकर अपना कारोबार जारी रखते रहेंगे। अब देखना यह होगा कि आमादरहा क्षेत्र में सामने आई गतिविधियों पर जिम्मेदार विभाग कितनी गंभीरता दिखाते हैं और माण्ड नदी को अवैध उत्खनन से बचाने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
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