ए.के.एस. विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने जंग रोकने की खोज में हासिल की बड़ी सफलता।
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सतना। एकेएस यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने शोध के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। विश्वविद्यालय के बेसिक साइंस संकाय के अधिष्ठाता डॉ. शैलेन्द्र यादव एवं रसायन विज्ञान विभाग के सहायक प्राध्यापक व संक्षारण वैज्ञानिक डॉ. धीरज सिंह चौहान का शोध प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका रिजल्ट्स इन केमिस्ट्री में प्रकाशित हुआ है। 4.2 इम्पैक्ट फैक्टर वाली यह पत्रिका विश्व वैज्ञानिक समुदाय में महत्वपूर्ण मानी जाती है।

वैज्ञानिकों के शोध का विषय इस्पात को जंग से बचाने की नई और पर्यावरण-अनुकूल तकनीक विकसित करना है। शोध में अवधि-समाप्त अमांटाडाइन दवा को रासायनिक रूप से संशोधित कर “ग्रीन करॉजन इनहिबिटर” तैयार किया गया, जिसने इस्पात पर जंग रोकने में लगभग 97 प्रतिशत तक प्रभाव दिखाया।शोधकर्ताओं के अनुसार यह तकनीक भविष्य में उद्योगों में उपयोग होने वाले महंगे और विषैले रसायनों का बेहतर विकल्प बन सकती है।

खास बात यह है कि बेकार हो चुकी दवाओं का उपयोग कर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। विश्वविद्यालय प्रबंधन ने इसे संस्थान के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि इस तरह के शोध न केवल वैज्ञानिक क्षेत्र में नई संभावनाएँ खोलते हैं, बल्कि समाज और उद्योगों के लिए भी उपयोगी साबित होते हैं।
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