एकेएस विश्वविद्यालय में रिसर्च प्रपोजल्स पर 5 दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम सम्पन्न।135 शिक्षकों एवं शोधार्थियों ने लिया सक्रिय भाग।
1 min read
सतना। 05 मई 2026। एकेएस विश्वविद्यालय, सतना के सेंटर फॉर रिसर्च इनोवेशन, इनक्यूबेशन, एंड स्किल डेवलपमेंट (सीआरआईआईएसडी), इंस्टीट्यूशंस इनोवेशन काउंसिल (आईआईसी) एवं डायरेक्टरेट ऑफ रिसर्च के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 5 दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) एवं प्रायोगिक कार्यशाला “अनुसंधान विचारों को वित्तपोषित परियोजनाओं में रूपांतरित करना” का सफलतापूर्वक समापन हुआ। इस कार्यक्रम में देशभर से कुल 135 शिक्षकों एवं शोधार्थियों ने सहभागिता की।

कार्यक्रम का शुभारंभ 01 मई 2026 को माननीय प्रो-चांसलर श्री अनंत कुमार सोनी एवं कुलपति प्रो. बी.ए. चोपड़े के प्रेरणादायक उद्बोधन से हुआ। कार्यक्रम का परिचय प्रो. कमलेश चौरे द्वारा प्रस्तुत किया गया तथा स्वागत भाषण प्रो. नीरज वर्मा ने दिया। कार्यक्रम के प्रथम दिवस पर डॉ. सूरजभान सेवदा (राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, वारंगल) ने “भारत के अनुसंधान वित्तपोषण तंत्र एवं विचार रूपांतरण” विषय पर व्याख्यान देते हुए डीबीटी, डीएसटी, आईसीएआर, सीएसआईआर आदि प्रमुख एजेंसियों की जानकारी प्रदान की। द्वितीय एवं तृतीय दिवस पर डॉ. विशाल मिश्रा (भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, बीएचयू) ने अनुसंधान प्रस्ताव की संरचना, समस्या निर्धारण, अनुसंधान पद्धति, बजट निर्माण, समय-निर्धारण एवं प्रस्तुति रणनीतियों पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया।

चौथे दिन प्रतिभागियों द्वारा स्व-अध्ययन के अंतर्गत अपने-अपने अनुसंधान प्रस्ताव तैयार किए गए, जिनका मूल्यांकन विशेषज्ञों द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अंतिम दिवस 05 मई 2026 को विवेकानंद सभागार में आयोजित ऑफलाइन प्रायोगिक कार्यशाला में डॉ. जी. श्रीनिवास (इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, गोवा क्षेत्रीय केंद्र) ने प्रतिभागियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया।
कार्यक्रम के अंतर्गत अनुसंधान समस्या की पहचान, अनुसंधान पद्धति का निर्धारण, प्रस्ताव लेखन, बजट योजना एवं वित्तपोषण एजेंसियों के साथ समन्वय जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रायोगिक सत्र आयोजित किए गए। समापन अवसर पर प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया।

इस कार्यक्रम के सफल संचालन में समन्वयक एवं संयोजक के रूप में
डॉ. नीरज वर्मा, डॉ. प्रियंका रानी बागरी, डॉ. सी. पी. सिंह, डॉ. विवेक अग्निहोत्री एवं डॉ. कमलेश चौरे का विशेष योगदान रहा।
यह कार्यक्रम अनुसंधान एवं नवाचार को प्रोत्साहित करने तथा शिक्षकों एवं शोधार्थियों को गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान प्रस्ताव तैयार करने हेतु सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुआ।
Subscribe to my channel