ए.के.एस. विश्वविद्यालय माइनिंग स्टूडेंट्स का यूसीआईएल के नरवापहाड़ खदान का भ्रमण।
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सतना। ए.के.एस. विश्वविद्यालय के खनन अभियांत्रिकी विभाग के छात्रों (बी.टेक छठा सेमेस्टर तथा डिप्लोमा (एमएमएस) छठा सेमेस्टर) ने यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड द्वारा संचालित नरवापहाड़ यूरेनियम खदान एवं जादूगोड़ा यूरेनियम खदान का भ्रमण किया। 22 छात्रों (17 बी.टेक एवं 5 डिप्लोमा, जिनमें 7 छात्राएँ शामिल थीं) के इस दल के साथ प्रो. पी. के. पालित भी उपस्थित थे। यह खदान झारखंड में स्थित है,

जो टाटानगर से लगभग 13 किमी दूर है। यह अध्ययन भ्रमण 23 अप्रैल से 25 अप्रैल 2026 तक तीन दिनों तक चला।23 अप्रैल को छात्रों ने अपनी यात्रा की शुरुआत सूचना केंद्र से की, जहाँ उन्होंने विकिरण के लाभ एवं हानियों, थ्रेशोल्ड लिमिट वैल्यू (TLV) के बारे में जानकारी प्राप्त की तथा विभिन्न यूरेनियम युक्त शैल नमूनों का अध्ययन किया। उन्हें अंतिम उत्पाद “येलो केक” के बारे में भी बताया गया, जिसे हैदराबाद स्थित एनएफसी को भेजा जाता है, तथा खदान कर्मियों द्वारा उपयोग किए जाने वाले मॉनिटरिंग उपकरणों से भी परिचित कराया गया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने खदान का मॉडल देखा, खदान के जल के लिए शून्य निर्वहन प्रणाली के बारे में जाना तथा खनन एवं मिलिंग के विभिन्न चरणों को दर्शाने वाले चित्रों का अवलोकन किया। बाद में उन्होंने भूमिगत क्रशिंग स्टेशन तथा कट-एंड-फिल पद्धति से संचालित कार्यरत स्टोप का दौरा किया। यहाँ उन्हें स्टोपिंग तकनीक, ड्रिलिंग कार्य एवं एलएचडी के माध्यम से मलबा हटाने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी गई।24 अप्रैल को छात्रों ने हेल्थ फिजिक्स यूनिट (भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र की एक इकाई), प्लानिंग सेल, सर्वे विभाग तथा व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र का दौरा किया। वे 7-डिग्री एक्सेस डिक्लाइन के माध्यम से खदान के 45 मीटर स्तर तक नीचे गए, जहाँ उन्होंने लोडिंग स्टेशन, धूल नियंत्रण तकनीक तथा प्रथम स्तर तक जाने वाले क्रॉस-कट्स का निरीक्षण किया। सतह पर लौटने के बाद उन्होंने स्टोइंग प्लांट का भी दौरा किया।25 अप्रैल को उन्होंने जादूगोड़ा स्थित मिल का भ्रमण किया, जहाँ उन्हें फ्लो डायग्राम समझाया गया तथा उन्होंने क्रशिंग से लेकर अंतिम उत्पाद की सीलिंग तक की विभिन्न प्रक्रियाओं का अवलोकन किया। इसके बाद उन्होंने रेस्क्यू रूम कम रिफ्रेशर ट्रेनिंग (RRRT) का दौरा किया, जहाँ उन्हें BG4 जैसे नवीनतम बचाव उपकरणों के बारे में प्रत्यक्ष जानकारी दी गई तथा उसके विभिन्न भागों एवं उनके उपयोग की जानकारी प्रभारी द्वारा समझाई गई।छात्रों ने क्षेत्र के प्रसिद्ध रनकिनी मंदिर में भी अपनी श्रद्धा अर्पित की, जो प्रतिदिन अनेक श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। यात्रा का समापन अंतिम दिन अवकाश के दौरान टाटानगर के प्रसिद्ध जुबिली पार्क के भ्रमण के साथ हुआ। विश्वविद्यालय प्रबंधन ने इसे छात्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया है।
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