विश्व प्रसिद्ध वैज्ञानिक प्रो अशोक पांडे का क्लाइमेट चेंज, ग्लोबल वार्मिंग व सस्टेनेबल एनवायरनमेंट पर व्याख्यान
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सतना। एकेएस विश्वविद्यालय, सतना के फैकल्टी ऑफ लाइफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के अंतर्गत डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी एवं लाइफ साइंस क्लब द्वारा पॉपुलर एक्सपर्ट लेक्चर सीरीज़ का भव्य आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट वक्ता प्रोफेसर अशोक पांडे (एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर, सेंटर फॉर एनर्जी एंड एनवायरनमेंटल सस्टेनेबिलिटी), लखनऊ रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन एवं एकेएस विश्वविद्यालय कुलगीत के साथ हुआ। स्वागत उद्बोधन प्रो. दीपक मिश्रा द्वारा प्रस्तुत किया गया। इस उद्घाटन समारोह का सफल संचालन डॉ. माही चौरे द्वारा किया गया। कार्यक्रम में प्रो. बी.ए. चोपड़े (वाईस चांसलर एकेएस विश्वविद्यालय ) ने अपने उद्बोधन में प्रो. पांडेय का स्वागत करते हुए विद्यार्थियों को अनुसंधान एवं नवाचार के प्रति प्रेरित किया। फैकल्टी ऑफ लाइफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के डीन डॉ. कमलेश चौरे ने मुख्य अतिथि प्रो. अशोक पांडे का औपचारिक परिचय देते हुए उनके वैज्ञानिक योगदानों पर प्रकाश डाला। उद्घाटन समारोह के अंत में डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी की विभागाध्यक्ष प्रो. अश्विनी ए. वाऊ ने आभार व्यक्त किया।

उद्घाटन समारोह के पश्चात प्रोफेसर अशोक पांडे ने डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी को अपने द्वारा संपादित एवं लिखित कई महत्वपूर्ण पुस्तकें भेंट की । ये पुस्तकें स्प्रिंगर नेचर, एल्सेवियर तथा सीआरसी प्रेस जैसे अंतरराष्ट्रीय प्रकाशनों से प्रकाशित हैं। इन पुस्तकों के माध्यम से विभाग के संकाय सदस्यों एवं विद्यार्थियों को अपने ज्ञान को उन्नत करने तथा पर्यावरण एवं जैवप्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हो रहे नवीनतम शोध एवं प्रगति को समझने में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी।

इस अवसर पर प्रो. अशोक पांडेय ने “सस्टेनेबल एनवायरनमेंट : ग्लोबल वार्मिंग एंड क्लाइमेट चेंज” विषय पर अत्यंत प्रभावशाली एवं ज्ञानवर्धक व्याख्यान दिया। अपने व्याख्यान में उन्होंने वैश्विक जलवायु परिवर्तन, पर्यावरणीय असंतुलन एवं इसके गंभीर प्रभावों पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने विशेष रूप से व्यवहारिक स्थिरता , सिविक सेंस, कार्बन फुटप्रिंट, वैश्विक समझौते, एवं नीतिगत निर्णयों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग की भूमिका पर जोर दिया।
प्रो. अशोक पांडे ने आर्कटिक क्षेत्र, दक्षिणी यूरोप एवं एशिया में बढ़ते तापमान, हिमालयी ग्लेशियरों के पिघलने, बाढ़-प्रभावित क्षेत्रों, इंटरगवर्नमेंटल पैनल आन क्लाइमेट चेंज के निष्कर्षों तथा ब्राजील कन्वेंशन एवं सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स जैसे वैश्विक प्रयासों का उल्लेख करते हुए वर्तमान पर्यावरणीय संकट की गंभीरता को रेखांकित किया।

प्रो. पांडेय ने यह भी बताया कि जैवप्रौद्योगिकी पर्यावरण संरक्षण एवं ऊर्जा क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि अर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं जैवप्रोद्योगिकी का समन्वय ही आधुनिक युग की आवश्यकता है, जिससे सतत विकास को गति मिल सकती है।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे, जिनमें डॉ. ए.के. भौमिक (डीन, फैकल्टी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज), डॉ. आर.एल.एस. सिकारवार (डायरेक्टर, इंडियन नॉलेज सिस्टम ), डॉ. महेंद्र तिवारी (डीन, स्टूडेंट वेलफेयर), डॉ. नीरज वर्मा (डायरेक्टर, रिसर्च) शामिल थे।
व्याख्यान के पश्चात प्रो. अशोक पांडेय ने बायोटेक्नोलॉजी विभाग के संकाय सदस्यों के साथ संवाद किया तथा उनके शोध कार्यों एवं आगामी परियोजनाओं पर चर्चा की। उन्होंने संकाय को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं मशीन लर्निंग को जैवप्रौद्योगिकी अनुसंधान में शामिल करने के लिए मार्गदर्शन भी प्रदान किया। इस पूरे कार्यक्रम का नेतृत्व प्रो. कमलेश चौरे, प्रो. दीपक मिश्रा, डॉ माही चौरे एवं डॉ. विवेक कुमार अग्निहोत्री द्वारा किया गया।
कार्यक्रम में डॉ. मोनिका सोनी, डॉ. कमलेश सोनी, पारस कोशे, डॉ. कीर्ति समदरिया, डॉ. सौरभ, डॉ. शिल्पी, प्रतिमा मिश्रा, किर्ति सिंह, श्रेष्ठ राज, अर्पित श्रीवास्तव, परमार केशरी नंदन, धीरेंद्र मिश्रा, शैली मिश्रा एवं नितिन सिंह परिहार सहित अनेक संकाय सदस्य एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
यह आयोजन न केवल ज्ञानवर्धक रहा, बल्कि विद्यार्थियों एवं शोधकर्ताओं के लिए पर्यावरणीय चुनौतियों एवं आधुनिक तकनीकों के समन्वय को समझने का एक महत्वपूर्ण अवसर भी सिद्ध हुआ।
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