April 11, 2026

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AKS विश्वविद्यालय में वैज्ञानिक मुर्गी पालन मॉडल विकसित, छात्रों को मिल रहा “सीख के साथ रोजगार” का प्रशिक्षण।

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सतना। एकेएस विश्वविद्यालय, सतना के कृषि संकाय द्वारा विकसित वैज्ञानिक मुर्गी पालन मॉडल आज शिक्षा और रोजगार के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभर रहा है। विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों को अत्याधुनिक तकनीकों के माध्यम से पोल्ट्री प्रबंधन का व्यवहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है,

जिससे वे स्वरोजगार एवं उद्यमिता की दिशा में अग्रसर हो सकें।विश्वविद्यालय में कड़कनाथ, नर्मदा निधि, सोनाली तथा असिल (रोड आइलैंड रेड) जैसी देशी एवं उन्नत नस्लों का सुव्यवस्थित पालन-पोषण किया जा रहा है। इनमें कड़कनाथ अपने उच्च पोषणयुक्त काले मांस के लिए प्रसिद्ध है, जबकि सोनाली एवं आरआईआर नस्लें अंडा एवं मांस उत्पादन दोनों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रही हैं।

हेचरी (इनक्यूबेटर) में निषेचित अंडों को रख कर चूज़े निकाला जाता है ॥

नर्मदा निधि एवं असिल नस्लें स्थानीय परिस्थितियों में बेहतर अनुकूलन एवं रोग प्रतिरोधक क्षमता के कारण विशेष महत्व रखती हैं।मुर्गियों का पालन अर्ध-मुक्त एवं पूर्ण नियंत्रित प्रणाली के अंतर्गत किया जा रहा है, जिसमें संतुलित आहार, स्वच्छ पेयजल, नियमित टीकाकरण एवं उच्च स्तरीय स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाता है।

परिणामस्वरूप अंडा उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा रही है, जिससे चूज़ा उत्पादन (हैचरी) को भी गति मिली है।विशेष रूप से, विश्वविद्यालय में 550 अंडों की क्षमता वाले आधुनिक इनक्यूबेटर के माध्यम से विभिन्न नस्लों के गुणवत्तापूर्ण चूजों का उत्पादन किया जा रहा है। नियंत्रित तापमान पर इनक्यूबेशन एवं नवजात चूजों की वैज्ञानिक देखभाल से उत्पादन की सफलता दर में निरंतर सुधार हो रहा है।

पोल्ट्री इकाई में विद्यार्थियों को आवास प्रबंधन, संतुलित आहार व्यवस्था, स्वच्छता, रोग नियंत्रण एवं टीकाकरण की समग्र जानकारी व्यवहारिक रूप से दी जा रही है। साथ ही, चूज़ों के लिए ब्रूडिंग, स्टार्टर फीड, उचित स्थान एवं सुरक्षा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।“सीख के साथ कमाई” की अवधारणा को साकार करते हुए ए के एस विश्वविद्यालय का यह मॉडल विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रेरित कर रहा है। साथ ही, यह पहल क्षेत्रीय किसानों के लिए भी एक प्रेरणास्रोत बनकर आधुनिक एवं लाभकारी मुर्गी पालन की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान कर रही है।— कु. गरिमा सिंह,फैकल्टी,ए के एस विश्वविद्यालय, सतना मध्यप्रदेश

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