कोयला खनन पर सियासी संग्राम: रहस्यमयी तरीके से बदला नियंत्रण, सवालों के घेरे में प्रशासन
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पूर्व संचालक हटे, नए चेहरों का कब्जा — सत्ता की सख्ती के बीच खनन क्षेत्र में उठे गंभीर सवाल

अनूपपुर/शहडोल। यशपाल जाट
जिले के कोयला खनन क्षेत्र में इन दिनों अचानक हुए बदलाव ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। लंबे समय से संचालित अवैध खनन व्यवस्था में एक बड़ा फेरबदल देखने को मिला है, जहां पुराने नामों की जगह अब नए लोगों का दबदबा नजर आ रहा है।
सूत्रों के अनुसार, पहले जिन लोगों के नियंत्रण में यह पूरा नेटवर्क था, उन्हें किनारे कर दिया गया है और अब कथित रूप से उनके ही करीबी नए चेहरे पूरे तंत्र को संचालित कर रहे हैं। यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब प्रदेश स्तर पर अवैध गतिविधियों पर सख्ती के निर्देश दिए जा चुके हैं।
मुख्यमंत्री की सख्ती के बीच बढ़ा संदेह
प्रदेश सरकार द्वारा अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए लगातार निर्देश जारी किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात इसके उलट दिखाई दे रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्रवाई के नाम पर केवल चेहरों की अदला-बदली हुई है, जबकि असली खेल पहले की तरह जारी है।
नया नेटवर्क, पुराना तरीका
जानकार बताते हैं कि खनन, परिवहन और सप्लाई का पूरा सिस्टम पहले की तरह ही काम कर रहा है। फर्क सिर्फ इतना है कि अब इसे संचालित करने वाले नाम बदल गए हैं। इससे यह आशंका भी जताई जा रही है कि कहीं यह पूरा मामला अंदरखाने की रणनीति तो नहीं।
प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। यदि सख्ती के निर्देश दिए गए हैं, तो फिर अवैध गतिविधियां कैसे जारी हैं? क्या यह केवल दिखावे की कार्रवाई है या फिर जमीनी स्तर पर निगरानी कमजोर है?
मजदूर और आम जनता पर असर
इस अवैध खनन का सबसे ज्यादा असर स्थानीय मजदूरों और ग्रामीणों पर पड़ रहा है। उन्हें न तो सुरक्षा मिल रही है और न ही स्थायी रोजगार। जोखिम भरे हालात में काम करने के बावजूद उनकी स्थिति जस की तस बनी हुई है।
विपक्ष का हमला तेज
इस मुद्दे को लेकर विपक्ष भी सरकार पर हमलावर हो गया है। विपक्ष का कहना है कि यदि सख्ती के बावजूद अवैध खनन जारी है, तो यह कहीं न कहीं प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है।
निष्कर्ष:
कोयला खनन क्षेत्र में हुए इस अचानक बदलाव ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इन आरोपों पर क्या कार्रवाई करता है और क्या वास्तव में अवैध खनन पर रोक लग पाती है या नहीं।
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