एकेएस यूनिवर्सिटी में सतत विकास लक्ष्य पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का दूसरा दिन, विज्ञान व नवाचार पर गहन मंथन।
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सतना। एकेएस यूनिवर्सिटी में आयोजित 32वें अंतरराष्ट्रीय भौतिक विज्ञान अकादमी सम्मेलन कोनियप्स 32 के दूसरे दिन विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और पर्यावरण विज्ञान के माध्यम से सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी ) को प्राप्त करने के उपायों पर व्यापक चर्चा हुई। सम्मेलन के तकनीकी सत्र सेंट्रल हॉल और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म-2 पर आयोजित किए गए, जिनमें भारत-नेपाल सहित देश-विदेश के 50 से अधिक विशेषज्ञों ने भाग लिया।
सम्मेलन में शिक्षा जगत, उद्योग और सरकारी क्षेत्रों से जुड़े विशेषज्ञों ने बेसिक रिसर्च से लेकर उन्नत वैज्ञानिक निष्कर्षों तक के विषयों पर विचार साझा किए और सतत विकास के लिए विज्ञान-प्रौद्योगिकी की भूमिका पर जोर दिया।
विशेषज्ञों ने रखे शोध और विचार
आमंत्रित व्याख्यानों में डॉ. डेना सुनील (गणित विभाग, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय आदिवासी विश्वविद्यालय, अम्बेडकर) ने डेटा साइंस के वास्तविक जीवन में परिवर्तनकारी प्रभावों पर प्रकाश डाला। डॉ. वीरेंद्र उपाध्याय (भौतिक विज्ञान विभाग, महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय, चित्रकूट) ने रक्त प्रवाह से जुड़े नवीन मॉडलिंग और हृदय रोग अनुसंधान के वर्तमान रुझानों पर अपने विचार रखे।
डॉ. वैशाली दीक्षित (ड्रोनाचार्य इंजीनियरिंग कॉलेज, गुरुग्राम) ने पैथोजेनिक फंगस के विरुद्ध नाइट्रोपाइरीडाइन्स की एआई आधारित एंटीफंगल प्रभावकारिता पर व्याख्यान दिया, जबकि डॉ. चारू दुबे (फार्मेसी विभाग, एकेएस यूनिवर्सिटी) ने मानव स्वास्थ्य पर माइक्रोप्लास्टिक और नैनोप्लास्टिक के बढ़ते प्रभावों पर शोध प्रस्तुत करते हुए पर्यावरणीय खतरों के प्रति सजग रहने का संदेश दिया।
अखिलेश कुमार, प्रयागराज ने विवेकानंद हॉल के प्लेटफॉर्म-3 पर प्रभावशाली मौखिक प्रस्तुति दी, जिसे प्रतिभागियों ने सराहा।
कीनोट वक्ताओं ने बताए सतत विकास के आधुनिक आयाम
कीनोट वक्ताओं में डॉ. नीलिमा महतो, डॉ. कृष्णा वर्मा, डॉ. सोनाली भटनागर, डॉ. अमित कुमार सिंह और डॉ. प्रीति सिंह ने सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोणों पर प्रकाश डाला।
इसके अलावा प्रो. एम.एल. शर्मा (सेंट्रल यूनिवर्सिटी, काठमांडू, नेपाल), प्रो. आर.के. शर्मा (को-ऑर्डिनेटर, जी सी एन सी,दिल्ली), प्रो. पी.के. बाजपेयी (कुलपति, जयप्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा), प्रो. प्रेम प्रकाश सोलंकी (बीएचयू, वाराणसी), डॉ. हरीश रजक (गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर), डॉ. श्वेता लिखितकर (सेंट अलॉयसियस कॉलेज, जबलपुर) और डॉ. मिलन हाट (डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय, बिलासपुर) ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए।
मौखिक प्रस्तुतियों में हीरा अली, हीरा लाल वर्मा, पूजा देवी, अंकिता निरमलकर, विजया पाटकर और डॉ. अभिषेक सांगोली ने अपने शोध कार्य साझा किए।
विज्ञान से एसडीजी हासिल करने पर जोर
सत्रों में विशेषज्ञों ने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास से जुड़ी चुनौतियों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से वैश्विक भागीदारी ने सम्मेलन को और समृद्ध बनाया।
धन्यवाद ज्ञापन के साथ सत्र का समापन
ऑनलाइन सत्र के समापन पर भौतिकी विभागाध्यक्ष डॉ. सी.पी. सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी वक्ताओं, प्रस्तुतकर्ताओं, संकाय सदस्यों, स्टाफ और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों और शोधार्थियों के उत्साहपूर्ण प्रश्नों ने सम्मेलन को अत्यंत सार्थक बनाया।
उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन सतत विकास के लिए नवीन वैज्ञानिक तकनीकों को बढ़ावा देने के साथ वैश्विक ज्ञान-संवाद का प्रभावी मंच प्रदान करते हैं।
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