March 15, 2026

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कृषि भूमि पर फ्लाई एश का ‘खेल’! भू-भराव के नाम पर राखड़ डंप, बिना उत्पादन ही बिक गया धान

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धरमजयगढ़ – उद्योगों से निकलने वाली फ्लाई एश के सुरक्षित निपटान को लेकर जहाँ राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण द्वारा कड़े दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, वहीं रायगढ़ जिले में भू-भराव के नाम पर कृषि भूमि में फ्लाई एश डंप किए जाने का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। इस पूरे प्रकरण ने प्रशासनिक व्यवस्था और रिकॉर्ड प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार विधानसभा में प्रस्तुत विवरण में रायगढ़ जिले के कुछ निचले क्षेत्रों तथा खदान क्षेत्रों में फ्लाई एश भराव किए जाने की बात सामने आई है। इसके लिए जिन भूमि खसरों का उल्लेख किया गया है, वे वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड में कृषि भूमि के रूप में दर्ज हैं। यानी जिन जमीनों को सरकारी दस्तावेजों में खेती योग्य बताया गया है, उन्हीं पर फ्लाई एश डंप करने की अनुमति दी गई है।
मामले को और भी उलझाने वाला तथ्य यह है कि संबंधित खसरा नंबरों के स्वतंत्र विश्लेषण में यह सामने आया कि उसी भूमि से इस वर्ष धान की बिक्री भी दर्ज की गई है। जबकि मौके की वास्तविक स्थिति इससे बिल्कुल विपरीत दिखाई देती है।
एक किसान का कहना है कि उसकी जमीन पर फ्लाई एश डंप किया जा रहा है, क्योंकि उसने उस भूमि पर कभी खेती नहीं की और जमीन बंजर पड़ी थी। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब किसान खुद खेती न करने की बात कह रहा है, तो उसी जमीन से धान का उत्पादन दिखाकर बिक्री कैसे दर्ज हो गई।
संदेह के घेरे में कई प्रक्रियाएँ –
इस पूरे मामले में कई ऐसे पहलू सामने आए हैं जो फ्लाई एश डंपिंग की अनुमति और धान विक्रय पंजीयन प्रक्रिया में संभावित लापरवाही या अनियमितता की ओर इशारा करते हैं। कृषि भूमि पर फ्लाई एश डालने की अनुमति अपने आप में गंभीर विषय है, वहीं उत्पादन न होने के बावजूद धान की बिक्री दर्ज होना भी कई सवाल खड़े करता है।
विधानसभा में मंत्री ने बताया था प्रतिबंधित –
इस मुद्दे पर पूर्व विधानसभा सत्र 2024 के दौरान पूछे गए एक प्रश्न के जवाब में प्रदेश के वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया था कि कृषि भूमि पर तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की अनुमति के बिना वन भूमि पर फ्लाई एश (राखड़) डालना प्रतिबंधित है।
खुल सकते हैं और भी राज –
स्थानीय स्तर पर इस मामले को लेकर जिला प्रशासन से संवाद किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। यदि निजी भूमि पर फ्लाई एश डंप करने के इस पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच होती है, तो संभावना है कि इससे जुड़ी अन्य अनियमितताएँ भी उजागर हो सकती हैं।

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