पेगोलिन तस्करी केस में नया खुलासा: जैतपुर वन परिक्षेत्र ट्रेनिंग में आए IFS अधिकारी को कानूनी प्रक्रिया की जानकारी नहीं! 24 घंटे से ऊपर आरोपीयों को रखा हिरासत में।।
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वरिष्ठ अधिकारियों ने गलती छुपाई, छोटे कर्मचारियों को बनाया ‘बलि का बकरा’*
*घोरवे सर्किल के लिए लगती है बोली आम चर्चा हुई तेज।

शहडोल।*
*दक्षिण वन मंडल में पेगोलिन तस्करी मामले पर चल रहा विवाद अब एक नए और चौंकाने वाले मोड़ पर पहुँच गया है। जैतपुर वन परिक्षेत्र में तैनात ट्रेनिंग पर आए IFS अधिकारी को ही यह बुनियादी कानूनी जानकारी नहीं थी कि किसी भी आरोपी को 24 घंटे से अधिक रखना अवैध है और उसके लिए कोर्ट से रिमांड आवश्यक होती है।*
*IFS अधिकारी की अज्ञानता से बिगड़ा पूरा केस जानकारी के अनुसार, ट्रेनिंग में आए IFS अधिकारी ने नियमों की जानकारी न होने के कारण आवश्यक न्यायालयीन प्रक्रिया का पालन नहीं किया।*
*यानी—आरोपियों को पकड़ा गया,पूछताछ हुई,हिरासत में रखा गया,लेकिन 24 घंटे के भीतर कोर्ट में प्रस्तुत करने और रिमांड लेने की प्रक्रिया पूरी ही नहीं की गई। यही सबसे बड़ी चूक थी, जिसने पूरे केस को कानूनी रूप से कमजोर कर दिया।*
*वरिष्ठ अधिकारी को जानकारी लगते ही शुरू हुआ “कवर-अप” ऑपरेशन*
*जब यह बात दक्षिण वन मंडल स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुँची, तो उन्होंने अपनी जिम्मेदारी से बचते हुए गलती को छुपाने का रास्ता चुना।*
*इसका नतीजा यह निकला कि छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई,डिप्टी रेंजर को निलंबन,IFS अधिकारी और मंडल स्तर के वरिष्ठ—दोनों सुरक्षित।*
*यही कारण है कि विभागीय स्टाफ और जनता में गुस्सा है कि“जिस अधिकारी की गलती से पूरा मामला बिगड़ा, वही बचा लिया गया।”*
*घोरवे सर्किल की पोस्टिंग पर “बोली” शुरू — रेत चोरी का बड़ा खेल?घोरवे सर्किल में हाल ही में रिक्त हुई पोस्टिंग को लेकर चर्चाएँ गरम हैं।*
*स्थानीय सूत्रों के अनुसार—*
*इस पोस्ट पर तैनाती के लिए “बोली लगाने” की चर्चा तेज*
*क्योंकि घोरवे क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन और उसके हिस्से को लेकर बड़े पैमाने पर ‘कट’ सिस्टम चलता है और इस हिस्सेदारी में विभाग के कई स्तरों तक पैसा ऊपर तक जाने की बात सामने आती है*
*इसी वजह से इस पोस्ट को “सबसे लाभदायक क्षेत्र” माना जा रहा है।*
*यही कारण है कि दक्षिण मंडल का प्रशासन पारदर्शी कार्रवाई करने की बजाय छोटे कर्मचारियों को फँसा कर पोस्टिंग और वसूली के पुराने ढर्रे को बचाने में लगा दिखाई देता है।*
*छोटे कर्मचारियों का आरोप — “हम बलि का बकरा बने”*
*वन कर्मियों का कहना है—बड़े अधिकारी की गलती ट्रेनिंग IFS की अनभिज्ञता मंडल के दफ्तर में ली गई गलत फैसले और जिम्मेदारी का बोझ*
*सब नीचे के कर्मचारियों पर डाल दिया गया।*
*जनता का सवाल: क्या वन विभाग रेत, तस्करी और पोस्टिंग माफिया के हाथों में है?जब गलती IFS और वरिष्ठ स्तर पर हुई तो कार्रवाई नीचे क्यों?*
*घोरवे सर्किल वन मंडल में चोरी की रेत का हिस्सा किन-किन तक जाता है?*
*पेगोलिन जैसे अंतरराष्ट्रीय अपराध में न्यायिक प्रक्रिया की अवहेलना किसके आदेश पर हुई?घोरवे सर्किल की पोस्टिंग को लेकर “बोली” की चर्चा क्यों?*
*निष्पक्ष जांच की मांग और आंदोलन की चेतावनी*
*क्षेत्र के समाजसेवी, युवाओं, और जनप्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है—“यदि ज़िम्मेदार IFS और वरिष्ठ अधिकारी पर कार्रवाई नहीं हुई, तो जिले में बड़ा आंदोलन होगा।”*
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