विरसा मुंडा जन्म दिवस विशेष आदिवासी समाज के क्रांतिकारी जन नायक थे बिरसा मुंडा
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चित्रकूट, 14 नवंबर 2025
महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के संगीत शिक्षक डॉ. दादू राम श्रीवास के अनुसार धरती आबा के नाम से प्रसिद्ध बिरसा मुंडा भारत के आदिवासी समाज के महान क्रांतिकारी नायक थे।वह सिर्फ 15 वर्ष की उम्र में अंग्रेजी के खिलाफ एक बड़ा विद्रोह खड़ा करने वाले योद्धा बने उन्होंने अपने जीवन को आदिवासियों के अधिकार संस्कृति और पहचान को बचाने में समर्पित कर दिया आज भी आदिवासी समाज श्रद्धा से उन्हें याद करता है और भगवान का दर्जा देता है।
इनका जन्म 15 नवंबर 1875 को झारखंड के खूंटी जिले के उलिहातू गांव में हुआ था, हमारा देश जनजातीय गौरव दिवस के रूप में 15 नवंबर को बिरसा मुंडा के जन्म दिवस का आयोजन करता चला आ रहा है।भारत के स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय समुदायों के योगदान को सम्मानित करने के क्रम में पहली बार स्वतंत्रता के 75वें वर्ष पूर्ण होने पर वर्ष 2021 से बिरसा मुंडा के जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत की गई। तब से प्रतिवर्ष भगवान बिरसा मुंडा के जन्म दिवस को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में पूरे भारतवर्ष में मनाया जाता है। इस वर्ष जनजातीय नायकों के पराक्रम दूरदर्शिता और योगदान को भावभीनी श्रद्धांजलि देने के लिए जनजाति गौरव वर्ष पखवाड़ा 1 नवंबर से 12 नवंबर 2025 तक पूरे देश में बड़े उत्साह के साथ शुरू हुआ पखवाड़े भर चलने वाला यह उत्सव भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के उपलक्ष में वर्ष भर चलने वाले जनजातीय गौरव वर्ष का हिस्सा है।
हमारे क्रांतिकारियों, सन् सन्तावन के गदर के योद्धाओं तथा स्वतंत्रता आंदोलन के वीरों के लिए छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध कवि स्व. हरि ठाकुर ने ठीक लिखा हैकि
कतको सुराज बर मरिन खपिन, घर बार अपन बरबाद करिन
सन् उन्नीस सौ सैतालीस म
तब देश ला उन आजाद करिन ।
इतिहास में गूंजता एक नाम है वह थे बिरसा मुंडा जी ।
शेर की दहाड़ का जश था जिसमें वो थे बिरसा मुंडा जी।
अंग्रेजों के विरुद्ध बिरसा
तीर कमान को थाम कर
देश के दुश्मन को ललकारा जिसने सीना तानकर
झुका नहीं वह बिका नहीं ,
लड़ा वह दिल तूफानकर।
अन्याय से कभी डरा नहीं, मृत्यु को समीप जानकर।
उसका सपना था आजादी, भूमिपुत्र गया कमालकर ।
संगठन की वह नीव बना ,
कुर्बान हुआ उत्थान कर।
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