हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड का 59वां स्थापना दिवस एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
कोलकाता में।
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हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड के 59वें स्थापना दिवस के अवसर पर “विकसित भारत@2047 के लिए क्रिटिकल और स्ट्रैटेजिक मिनरल्स” विषय पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर देश-विदेश के विशेषज्ञों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और शिक्षाविदों ने भाग लिया।सम्मेलन के मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित भारत के खान एवं कोयला मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि क्रिटिकल और स्ट्रैटेजिक मिनरल्स भारत के भविष्य की रीढ़ हैं। उन्होंने बताया कि ये खनिज इलेक्ट्रिक वाहनों, नवीकरणीय ऊर्जा, रक्षा प्रौद्योगिकी और सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। भारत इन क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तीव्र गति से कार्य कर रहा है।
सम्मेलन के प्रथम सत्र की अध्यक्षता ए.के.एस. यूनिवर्सिटी, सतना के प्रो. जी.के. प्रधान ने की। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने के लिए खनिज आत्मनिर्भरता अत्यंत आवश्यक है। प्रो. प्रधान ने यह भी रेखांकित किया कि आज प्रधानमंत्री से लेकर देश की सभी प्रमुख संस्थाएं क्रिटिकल मिनरल्स की महत्ता को समझते हुए उनकी उपलब्धता और उत्पादन क्षमता बढ़ाने के प्रयासों में जुटी हैं।सम्मेलन के दौरान विशेषज्ञों ने विभिन्न दृष्टिकोणों से क्रिटिकल मिनरल्स की भूमिका पर चर्चा की। विचार-विमर्श में यह बात उभरकर सामने आई कि भारत को इन खनिजों की खोज, खनन और प्रसंस्करण की क्षमता को और सुदृढ़ करना होगा। साथ ही, इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरी स्टोरेज और हरित ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के लिए आवश्यक खनिजों की घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया। प्रतिभागियों ने यह भी सुझाव दिया कि रिसाइक्लिंग और सर्कुलर इकॉनमी को अपनाकर इन खनिजों की आपूर्ति को स्थिर बनाया जा सकता है।
चर्चा में अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया, ताकि मित्र देशों के साथ साझेदारी के माध्यम से एक मजबूत और सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला स्थापित की जा सके। विशेषज्ञों ने अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास को बढ़ावा देने की दिशा में विश्वविद्यालयों और उद्योगों के बीच सहयोग को और सशक्त बनाने पर भी बल दिया।सम्मेलन के अंत में ए.के.एस. यूनिवर्सिटी ने घोषणा की कि वह इस क्षेत्र में अनुसंधान को बढ़ावा देने हेतु एक “क्रिटिकल मिनरल्स रिसर्च ग्रुप” की स्थापना करने जा रही है, जो देश की खनिज आत्मनिर्भरता और विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।
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