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अवैध क्लिनिकों पर CMHO की चुप्पी से उठे सवाल — दो गांवों में खुला फर्जी इलाज का जाल, पत्रकारों पर दबाव

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रायगढ़, 07 नवम्बर 2025

रायगढ़ जिले में स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है।
लगातार अवैध क्लिनिक संचालन, बिना डॉक्टर इलाज, और पत्रकारों पर दबाव जैसी घटनाएं यह साबित कर रही हैं कि जिले में चिकित्सा नियंत्रण व्यवस्था पूर्णतः ढह चुकी है।
सबसे गंभीर बात — जिला चिकित्सा अधिकारी (CMHO रायगढ़) अब तक मौन हैं, जिससे यह संदेह गहराता जा रहा है कि क्या यह चुप्पी संरक्षण की निशानी है?


⚠️ मामला-1 : लैलूंगा में मेडिकल स्टोर की आड़ में चल रहा फर्जी क्लिनिक

ग्राम लारिपानी (लैलूंगा) में “Pradhan Medical & General Store” नामक दुकान पर उद्घोष समय की टीम ने पाया कि
👉 बिना डॉक्टर की मौजूदगी में इंजेक्शन और बोतल चढ़ाई जा रही थी,
👉 टूटी हड्डियों का इलाज और ड्रेसिंग जैसे कार्य किए जा रहे थे।

संचालक बाबूलाल प्रधान ने कैमरे पर स्वीकार किया —

“मेरे पिताजी की गलती है, हमें यह काम नहीं करना चाहिए था। अब हम इसे बंद कर देंगे।”

यह स्वीकारोक्ति ऑडियो रिकॉर्डिंग के रूप में सुरक्षित है।
लेकिन इस स्पष्ट प्रमाण के बावजूद CMHO रायगढ़ द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई।

जब पत्रकारों ने साक्ष्य सहित जानकारी भेजी, तो संचालक के पिता दयाधि प्रधान ने धमकी भरे लहजे में कहा —

“हम माननीय ओ.पी. चौधरी जी को जानते हैं, और उनसे आपकी शिकायत करेंगे।”

इस बयान ने अवैध क्लिनिक संचालन को संभावित राजनीतिक संरक्षण से जोड़ दिया है।
सूत्रों के अनुसार, इनके खिलाफ पूर्व में एक व्यक्ति की इलाज के दौरान मृत्यु का मामला भी दर्ज हो चुका है।


⚠️ मामला-2 : बारबंद में बीएससी छात्र का अवैध क्लिनिक, मेडिकल ऑफिसर से मिलीभगत के आरोप

थाना कापू क्षेत्र के ग्राम बारबंद में सिर्फ बीएससी छात्र संजीव राठिया द्वारा क्लिनिक चलाए जाने का भंडाफोड़ उद्घोष समय की टीम ने किया।
मौके पर आरोपी इंजेक्शन और बोतल लगाते पकड़ा गया।

लेकिन जैसे ही जांच शुरू हुई, आरोपी ने मेडिकल ऑफिसर शर्मा को फोन किया —
फोन कॉल के बाद परिस्थितियां अचानक बदल गईं, और अवैध क्लिनिक पर कार्रवाई की बजाय पत्रकारों के खिलाफ शिकायत तैयार की जाने लगी।

ग्रामवासियों का कहना है कि मेडिकल ऑफिसर शर्मा और संजीव राठिया के बीच गहरी मिलीभगत है।
गांव में एक और क्लिनिक भी बिना अनुमति के चल रहा है, जिसका संचालन वर्तमान बीडीसी सदस्य कर रहे हैं — उस पर भी कोई प्रशासनिक कार्रवाई नहीं हुई।


🧾 प्रशासनिक निष्क्रियता और CMHO की भूमिका

दोनों मामलों में प्रमाण और साक्ष्य के बावजूद CMHO रायगढ़ द्वारा अब तक कोई जांच आदेश या कार्रवाई नोटिस जारी नहीं किया गया
यह मौन न केवल विभागीय उदासीनता दिखाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि
👉 क्या जिले में फर्जी क्लिनिकों को “अंदरूनी संरक्षण” प्राप्त है?
👉 क्या पत्रकारों को डराकर सच्चाई दबाने की कोशिश की जा रही है?


⚖️ कानूनी प्रावधान जिनके अंतर्गत कार्रवाई संभव

  • Drugs & Cosmetics Act, 1940 — बिना प्रिस्क्रिप्शन दवा बिक्री दंडनीय अपराध।
  • Clinical Establishments Act, 2010 — बिना पंजीकरण इलाज कराना अवैध।
  • भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएं —
    • धारा 269: लापरवाही से जनस्वास्थ्य को खतरा,
    • धारा 270: जानबूझकर खतरनाक कार्य,
    • धारा 304A: लापरवाही से मृत्यु,
    • धारा 420: धोखाधड़ी से लाभ अर्जन।

📣 उद्घोष समय की मांग

1️⃣ जिला चिकित्सा अधिकारी (CMHO) रायगढ़ तत्काल सार्वजनिक जांच रिपोर्ट जारी करें।
2️⃣ “Pradhan Medical Store” और “संजीव राठिया क्लिनिक” दोनों के लाइसेंस निरस्त कर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
3️⃣ दोनों मामलों में संबंधित मेडिकल ऑफिसर्स की भूमिका की जांच डिविजनल लेवल कमेटी से कराई जाए।
4️⃣ पत्रकारों पर दबाव डालने वालों के खिलाफ धमकी और दबाव की धाराओं में FIR हो।
5️⃣ पूरे रायगढ़ जिले में संचालित सभी अवैध क्लिनिकों की पहचान और सीलिंग अभियान चलाया जाए।


🧩 निष्कर्ष

यह मामला केवल लैलूंगा या बारबंद का नहीं —
बल्कि यह जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था, प्रशासनिक पारदर्शिता और प्रेस की स्वतंत्रता से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।

जब अवैध क्लिनिक फल-फूल रहे हों और जिम्मेदार अधिकारी चुप रहें,
तो यह चुप्पी सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि मिलीभगत मानी जाती है।

अब सवाल सीधा है —
🩺 क्या CMHO रायगढ़ इन अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई करेंगे या मौन रहकर संरक्षण देते रहेंगे?
क्योंकि अब सवाल सिर्फ कानून का नहीं, बल्कि जनजीवन और लोकतंत्र की साख का है।


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