चित्रकूट में चल रहे तीन दिवसीय शरदोत्सव का नृत्य, गीत और संगीत की त्रिवेणी के साथ हुआ समापन
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मुंबई के पार्श्व गायकों ने सदाबहार फिल्मी गीतों से दर्शकों को किया भाव विभोर
मध्य प्रदेश शासन के जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला, पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार लखन पटेल रहे मौजूद
लोक संस्कृति, लोककलाओं और अन्य लोक विधाओं को संरक्षित करने शरदोत्सव का आयोजन महत्वपूर्ण – अभय महाजन

चित्रकूट 8 अक्टूबर 2025/ दीनदयाल शोध संस्थान द्वारा संस्कृति संचालनालय मध्यप्रदेश एवं जिला प्रशासन सतना व चित्रकूट क्षेत्र की जनता जनार्दन के सहयोग से चित्रकूट में पारम्परिक नृत्य एवं गायिकी केन्द्रित तीन दिवसीय शरदोत्सव की समापन संध्या में मुंबई के पार्श्व गायक धवल चांदवड़कर, नानू गुर्जर, रसिका गनू, डॉ. श्रद्धा जगताप, रसिका गावड़े द्वारा भारतीय चित्रपट संगीत के पुराने गीतों पर आधारित प्रस्तुतियां तथा डॉ. निवेदिता पण्डया इंदौर द्वारा कथक नृत्य की प्रस्तुति से दर्शकों को भाव विभोर किया। उन्होंने अपने अंदाज में गायन का ऐसा जादू चलाया कि लोग गुलाबी ठंड और भींगी-भीगी ओस के बीच में देर रात्रि तक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आनंद लेते रहे।

शरदोत्सव की समापन संध्या का शुभारंभ रामायणी कुटी के श्री महंत रामहद्रय दास जी महाराज, करह आश्रम के महंत माधव दास जी, आदि चुनचुन गिरी मठ के महंत भास्कर दास जी, पंजाबी भगवान आश्रम के महंत रामकुमार दास जी, मध्य प्रदेश शासन के जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री राकेश शुक्ला, पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार श्री लखन पटेल, बांदा चित्रकूट के पूर्व सांसद डॉ आरके सिंह पटेल, विधायक मैहर श्री कांत चतुर्वेदी, महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो भरत मिश्रा, सतना के महापौर योगेश ताम्रकार, समाजसेवी रमेश सिंह, व्यापार मंडल के अध्यक्ष श्री भागीरथ चौधरी, श्री सरदार सतनाम सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता श्री कमलेश मिश्रा, श्रीमती रंजना उपाध्याय, श्री सदानंद गौतम, पूर्व कुलसचिव बी भारती ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया।

दीनदयाल परिसर चित्रकूट में आयोजित शरदोत्सव की समापन संध्या को संबोधित करते हुए मध्यप्रदेश के पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार श्री लखन पटेल ने राष्ट्र ऋषि नानाजी देशमुख का स्मरण करते हुए कहा कि नानाजी के कृतित्व ने भगवान राम की तपोस्थली में चैतन्यता जगाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि उनकी ऊर्जा और प्रेरणा से उनके बताये मार्ग पर क्षेत्र का उत्थान किया जा सकता है। नानाजी जैसे महापुरुषों का संस्कारित विकास एवं अनुशासन ही देश को महान बनाता है। श्रेष्ठ पुरुषों के कृतित्व और व्यक्तित्व से आने वाली पीढ़ी मार्गदर्शन लेकर सही मार्ग पर चलती है। विश्व में समाज सेवा के क्षेत्र में दीनदयाल शोध संस्थान द्वारा किए जा रहे कार्य एक अनुकरणीय मॉडल है।

रामायणी कुटी के श्री महंत रामहद्रय दास जी महाराज ने अपने आशीर्वचनों में कहा कि चित्रकूट की जागृति, प्रभुता और सम्पन्नता यह सब नानाजी के आने से हुई है। नानाजी सम्पूर्ण राष्ट्र में एक जन जागृति लाते हैं। सेवा का भाव और मानव समाज के लिए समर्पण का भाव से नानाजी ने एक अलग उदाहरण समाज में प्रस्तुत किया है।
शरदोत्सव की आखिरी शाम मुंबई से आये गायकों के नाम रही जिन्होंने शानदार प्रस्तुतियों से दर्शकों को झूमने पर मजूबर कर दिया। भारतीय आख्यान परंपरा के वैष्णव नायक भगवान श्री कृष्ण की अलौकिक लीलाओं को केंद्र में रखकर भारतीय चित्रपट जगत में कई फिल्मों और पारंपरिक उत्सवों में अनेक गीत रचे और गाये गए हैं। ऐसे ही कुछ गीतों राम का गुणगान, पिया तोसे नैना लागे रे, मधुबन में राधिका नाची रे, लागा चुनरी में दाग आदि गीतों का कत्थक नृत्य के माध्यम से अद्भुत प्रस्तुति का शरदोत्सव की समापन संध्या में संयोजन किया गया। जिसमें इंदौर की ख्याति कत्थक कलाकार डॉ निवेदिता पण्डया ने अपने भावों की अभिव्यक्ति से नृत्य कथाजंलि प्रस्तुति से दर्शक श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया।

मुंबई के पार्श्व गायक धवल चांदवड़कर, नानू गुर्जर, रसिका गनू, डॉ. श्रद्धा जगताप, रसिका गावड़े ने भारतीय फ़िल्म संगीत के सदाबहार गानों की प्रस्तुति की। सुप्रसिद्ध गीत ‘आने से उसके आई बहार, बड़ी दूर से आए हैं प्यार का तोहफा लाए हैं, सत्यम शिवम् सुन्दरम्, लिखे जो खत तुझे, चुरा लिया है तुमने जो दिल को’ आदि शानदार गीतों को अपनी मधुर आवाज में प्रस्तुत किया। पूरी संध्या में नृत्य, गीत और संगीत की त्रिवेणी को दर्शकों ने अपार प्रेम और उत्साह प्रदान किया।

तीन दिनी शरदोत्सव समारोह का आभार प्रकट करते हुए दीनदयाल शोध संस्थान के राष्ट्रीय संगठन सचिव अभय महाजन ने कहा कि नानाजी के जन्मदिवस पर शरदोत्सव के जरिये देश की लोक संस्कृति, लोककलाओं और अन्य लोक विधाओं को सुरक्षित रखा जा सके इसी उद्देय से शरदोत्सव का आयोजन किया जाता है। यह आयोजन पारम्परिक सांस्कृतिक कलाओं को मंच प्रदान कर उसे गौरवान्वित कर क्षेत्रीय लोगों को आनंद और सुख प्रदान करते हुए सांस्कृति धरोहर को संरक्षित करने का माध्यम है।
प्रसिद्ध गायकों ने शरदोत्सव में छोड़ी अमिट छाप
राष्ट्र ऋषि नानाजी देशमुख के जन्मोत्सव से प्रारम्भ हुए तीन दिनी शरदोत्सव में अब तक देशभर के अनेक ख्याति प्राप्त कलाकार अपनी-अपनी प्रस्तुतियां देकर शरदोत्सव को अविस्मरणीय बना चुके है। प्रमुख रूप से अब तक प्रसिद्ध गायक अनुराधा पौडवाल, रवीन्द्र जैन, सुरेश वाडेकर, मनोज तिवारी, पवन तिवारी, विनोद राठौर, कैलाश खैर, नितिन मुकेश, प्रसिद्ध भजन सम्राट अनूप जलोटा एवं नृत्यांगना डोना गांगुली, सुधा चन्द्रन, डिम्पल डिप्युटी शाह, ग्रेसी सिंह, मोहित चौहान, उदित नारायण, पवनदीप राजन एवं अरुणिता कांजीलाल की प्रस्तुतियों ने शरदोत्सव को ऐतिहासिक बनाने में अपनी अमिट छाप छोड़ी है। शरदोत्सव के समापन पर संगीत का आनन्द लेने के लिये बहुत बड़ी तादाद में जन सैलाब उपस्थित रहा। फतेहपुर, झांसी, कानपुर, लखनऊ, प्रयागराज, बांदा, सतना, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, रीवा, जबलपुर आदि जिलों से तमाम लोगों का हुजूम शरदोत्सव देखने के लिये चित्रकूट आया।

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