धरमजयगढ़। धरमजयगढ़ मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर दूर ग्राम बोरो स्थित माँ बोरो रानी मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था का जीवंत प्रतीक है। कहते हैं कि यहाँ की पवित्र धरा पर पहुँचते ही मन एक अद्भुत शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठता है।
शारदीय और चैत्र नवरात्रि के अवसर पर मंदिर प्रांगण का दृश्य अलौकिक हो उठता है। भक्ति गीतों और मंत्रोच्चारण से गूँजता वातावरण हर भक्त को माँ की भक्ति में लीन कर देता है। नौ दिनों तक यहाँ विशेष पूजा-अर्चना, अखंड भजन-कीर्तन और सामूहिक आरती का आयोजन होता है। दूर-दराज़ से आने वाले श्रद्धालु भी इस दिव्य वातावरण में सम्मिलित होकर माँ बोरो रानी के दर्शन का लाभ उठाते हैं।
माँ की आरती के बाद प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का आयोजन किया जाता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता है यहाँ की पारदर्शिता—भंडारे में सहयोग करने वाले सभी दानदाताओं के नाम खुले रूप में घोषित किए जाते हैं। यह व्यवस्था न केवल श्रद्धालुओं के मन में विश्वास जगाती है, बल्कि दूसरों को भी तन, मन और धन से सहयोग हेतु प्रेरित करती है।
भक्ति, अनुशासन और सामूहिक सहयोग का यह अनुपम संगम नवरात्रि के दिनों में बोरो रानी मंदिर को एक जीवंत आध्यात्मिक धाम में बदल देता है। यहाँ पहुँचकर हर श्रद्धालु का मन माँ की महिमा और आशीर्वाद से परिपूर्ण होकर श्रद्धा, आस्था और संतोष का अद्भुत अनुभव करता है।