कद्दूवर्गीय सब्जियां गर्मी तथा वर्षा के मौसम की महत्वपूर्ण फसलें ।
1 min read
सतना। 2 मई। कद्दूवर्गीय सब्जियों का उत्पादन अच्छा होता है, परन्तु अधिक नमी और उचित तापमान मिलने के कारण कीट व रोग का प्रकोप अधिक रहता है,बहुत से कीट एवं व्याधियाँ कद्दूवर्गीय सब्जियों के उत्पादन को प्रभावित करते हैं तथा कभी-कभी प्रबंधन के अभाव में पूरी फसल को नष्ट कर देते हैं। अतः इन कीटों व रोगों का उचित समय पर उपयुक्त प्रबंधन करना आवश्यक है। कद्दूवर्गीय सब्जियों की फसलों में लगने वाले कीट व रोग में प्रमुख कीट एवं उनका प्रबंधन जरूरी है।फल मक्खी फलों पर अण्डे देती है तथा बाद में लार्वा फलों में घुसकर उन्हें अन्दर से खाते रहते है। इसकी रोकथाम के लिए खेत की निराई करके प्यूपा को नष्ट कर दें। ग्रसित फलों को भी एकत्रित करके नष्ट कर दें। मक्खियों को आकर्षित कर मारने के लिए मीठे जहर, जो इमिडाक्लोप्रिड 1.0 मि.ली. प्रति 3 लीटर तथा 1 प्रतिशत चीनी /गुड़ (10 ग्राम प्रति लीटर) से बनाकर 50 लीटर प्रति हैक्टयेर की दर से छिड़काव करें। फल मक्खी के नरों को आकर्षित करने के लिए 10 से 15 फेरोमैन ट्रेप (मिथाइल यूजिनोल) प्रति हैक्टेयर का प्रयोग भी किया जा सकता है। बेलों पर मैलाथियान 2.0 मि.ली. प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। लाल कद्दू भृंग ,यह कीट फसल की प्रारम्भिक अवस्था में पत्तियों को खाता है।वयस्क कीट पत्ते में टेढ़े-मेढ़े छेद करके पौधों की जड़ों, भूमिगत तने व भूमि से सटे फलों को नुकसान पहुंचाते हैं। फसल की अगेती बुवाई से कीट के प्रभाव को कम किया जा सकता है। संतरी रंग के भृंग को सुबह के समय इकट्ठा करके नष्ट कर दें। इनसे बचाव के लिए फसल पर कार्बोसल्फान नामक कीटनाशी का 1.5 से 2.0 मिली. प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर सुबह के समय छिड़काव करें। भूमिगत शिशुओं को नष्ट करने के लिए क्लारोपायरीफॉस 20 ईसी.2.5 लीटर प्रति हैक्टेयर हल्की सिंचाई के साथ इस्तेमाल करें और फसल खत्म होने पर बेलों को खेत से हटाकर बष्ट कर दें। सफेद मक्खी ,इस कीट के शिशुओं व वयस्कों द्वारा रस चूसने से पत्ते पीले पड़ जाते हैं। इनके मधुबिन्दु पर काली फफूंद आने से पौधों की भोजन बनाने की क्षमता कम हो जाती है। इसकी रोकथाम के लिए इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एस.एल.1.0 मिली प्रति 3 लीटर या डायमेथोएट 30 ई.सी. 2.0 मि.ली. प्रति लीटर या कार्बेरिल 50 डब्ल्यूपी 2.0 मिली. प्रति लीटर या स्पिनोसैड 45 स.सी. 1.0 मिली. प्रति 4 लीटर पानी का छिड़काव कर इल्लियों कों नष्ट कर दें। नीम बीज अर्क (5 प्रतिशत) या बी. टी. 1.0 ग्राम प्रति लीटर पानी का छिडकाव जरूरी है। चेंपा ,लगभग सभी कद्दूवर्गीय फसलों पर आक्रमण करते हैं।ये पौधों के कोमल पत्तियों व पुष्पकलिकाओं से रस चूसकर फसल को हानि पहुंचाते है। यह कीट वायरस जनित बीमारियों के वाहक का कार्य करती हैं। इसकी रोकथाम के लिए नाइट्रोजन खाद का अधिक प्रयोग न करें। इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एस. एल. 10 मिली. प्रति 3 लीटर या डाइमेथेएट 30 ई.सी. 2.0 मिली. प्रति या क्विनालफॉस 25 ई.सी. 2 मिली. प्रति लीटर पानी का छिड़काव करें। माईट या बरूथी कीट का प्रकोप मानसून पूर्व गर्म मौसम में प्रायः देखा जाता हैं। बरूथी का आक्रमण पत्तियों की निचली सतह पर होता हैं, जहाँ यह शिराओं के पास अण्डे देती हैं। वयस्क, पत्तियों का रस चूसती हैं तथा अपने चारो और रेशमी चमकीला जाल तैयार कर लेती हैं। बरूथी ग्रस्त पत्तियों की शिराओं के आसपास का क्षेत्र पीले रंग का – हो जाता हैं। कीट प्रकोप की तीव्र अवस्था में पत्तियाँ चितकबरी होकर चमकीली पीली हो जाती हैं। पत्ती पर – बने जाले पर मिट्टी के कारण जमा हो जाते हैं। इस अवस्था में पौधे से पत्तियों का गिरना शुरू हो जाता हैं। ।
Subscribe to my channel