September 29, 2026

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भारत माला-130ए में सिर्फ मुआवजे का विवाद नहीं, जंगल और हाथियों के रास्ते पर भी मंडरा रहा असर

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री-अलाइनमेंट में 4503 पेड़ों के आने की जानकारी, मेढरमार और धरमजयगढ़ के तेन्दुमार क्षेत्र में हाथियों के आवागमन मार्ग प्रभावित होने की आशंका !


धरमजयगढ़ – भारत माला-130ए के तहत प्रस्तावित सड़क निर्माण को लेकर अब मामला केवल जमीन अधिग्रहण और मुआवजे की दरों तक सीमित नहीं दिखाई दे रहा है। प्रभावित भू-स्वामियों की ओर से मुआवजा निर्धारण पर आपत्तियां उठाए जाने के बीच परियोजना के री-अलाइनमेंट से जंगल, पेड़ों और हाथियों के पारंपरिक आवागमन मार्ग पर संभावित प्रभाव का मुद्दा भी सामने आ रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रस्तावित री-अलाइनमेंट की जद में करीब 4503 पेड़ों के आने की बात सामने आई है। वहीं धरमजयगढ़ क्षेत्र के मेढरमार और तेन्दुमार जैसे इलाकों में हाथियों की नियमित आवाजाही को देखते हुए सड़क निर्माण से उनके आवागमन मार्ग प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा रही है।


मुआवजे से आगे बढ़ा मुद्दा
भारत माला-130ए के किमी 114.410 से किमी 121.450 तक लगभग 7.04 किलोमीटर हिस्से में निजी भूमि अधिग्रहण को लेकर भू-स्वामियों ने नई कलेक्टर गाइडलाइन दरों के आधार पर मुआवजे पर पुनर्विचार की मांग की है। उनका तर्क है कि भूमि मूल्यांकन की प्रक्रिया में प्रभावशील दरों और अधिसूचना के प्रकाशन की तारीख को लेकर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
लेकिन इसी परियोजना का दूसरा पहलू पर्यावरण और वन्यजीवों से जुड़ा हुआ है। यदि री-अलाइनमेंट के कारण बड़ी संख्या में पेड़ प्रभावित होते हैं और सड़क का मार्ग हाथियों की नियमित आवाजाही वाले क्षेत्रों से होकर गुजरता है, तो परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन केवल पेड़ों की संख्या तक सीमित न रहकर वन्यजीवों की आवाजाही और आवासीय संपर्क पर भी करना महत्वपूर्ण हो जाता है।
4503 पेड़ों के प्रभावित होने की जानकारी
जानकारी के अनुसार प्रस्तावित री-अलाइनमेंट में लगभग 4503 पेड़ प्रभावित होने की स्थिति बताई जा रही है। यह संख्या यदि संबंधित परियोजना अभिलेखों में दर्ज है, तो सड़क निर्माण के पर्यावरणीय प्रभाव का एक महत्वपूर्ण पहलू बनती है।
यही वजह है कि परियोजना के संदर्भ में केवल यह देखना पर्याप्त नहीं होगा कि कितनी जमीन अधिग्रहित हो रही है और उसका कितना मुआवजा दिया जाएगा। यह भी देखना होगा कि प्रस्तावित मार्ग से कितने वन क्षेत्र प्रभावित होंगे और पर्यावरणीय क्षति को कम करने के लिए क्या उपाय प्रस्तावित हैं।


मेढरमार और तेन्दुमार में हाथियों की आवाजाही चिंता का विषय
धरमजयगढ़ वन क्षेत्र हाथियों की मौजूदगी के लिए लंबे समय से संवेदनशील माना जाता रहा है। ऐसे में सड़क परियोजना का कोई भी नया मार्ग यदि हाथियों के नियमित आवागमन वाले क्षेत्र से गुजरता है, तो वन्यजीवों की आवाजाही पर संभावित प्रभाव का प्रश्न स्वाभाविक रूप से महत्वपूर्ण हो जाता है।
जानकारी के अनुसार मेढरमार और धरमजयगढ़ के तेन्दुमार क्षेत्र में हाथियों की नियमित आवाजाही होती है और प्रस्तावित री-अलाइनमेंट से इन मार्गों के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।


सड़क विकास के साथ वन्यजीव सुरक्षा भी जरूरी
सड़क परियोजनाओं में वन क्षेत्र और वन्यजीवों से जुड़े प्रभावों का आकलन केवल पेड़ों की संख्या के आधार पर नहीं किया जाता। हाथियों जैसे बड़े वन्यजीवों के लिए सड़कें आवागमन में अवरोध, दुर्घटना का जोखिम और उनके पारंपरिक मार्गों में बदलाव जैसी परिस्थितियां पैदा कर सकती हैं। इसलिए यदि प्रस्तावित मार्ग हाथियों की आवाजाही वाले क्षेत्रों को प्रभावित करता है, तो मार्ग नियोजन, सुरक्षित क्रॉसिंग, गति नियंत्रण, चेतावनी व्यवस्था और अन्य आवश्यक वन्यजीव संरक्षण उपायों पर भी संबंधित विशेषज्ञ एवं विभागीय स्तर पर विचार किया जाना महत्वपूर्ण होगा।
सवाल अब सिर्फ मुआवजे का नहीं
भारत माला-130ए के इस हिस्से में सामने आ रहा विवाद इसलिए व्यापक महत्व रखता है क्योंकि एक तरफ भू-स्वामी अपनी जमीन के उचित प्रतिकर और गणना की पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ प्रस्तावित री-अलाइनमेंट से बड़ी संख्या में पेड़ों के प्रभावित होने और हाथियों की आवाजाही वाले क्षेत्रों पर संभावित प्रभाव की बात सामने आ रही है।
ऐसे में परियोजना की समीक्षा का दायरा केवल “जमीन कितनी जाएगी और मुआवजा कितना मिलेगा” तक सीमित नहीं रह जाता। इसमें यह भी देखना होगा कि प्रस्तावित सड़क के लिए कितने पेड़ प्रभावित होंगे, वन क्षेत्र पर इसका कितना असर पड़ेगा, हाथियों की आवाजाही के ज्ञात मार्गों पर क्या प्रभाव पड़ सकता है और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए कौन-कौन से उपाय प्रस्तावित हैं !
भारत माला-130ए के इस री-अलाइनमेंट में अब निगाह केवल मुआवजा निर्धारण पर नहीं, बल्कि इस बात पर भी है कि विकास की इस सड़क के लिए कितने पेड़ प्रभावित होते हैं और हाथियों के नियमित आवागमन वाले क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए परियोजना में क्या प्रावधान किए जाते हैं। यही पहलू आने वाले समय में इस सड़क परियोजना के पर्यावरणीय मूल्यांकन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।

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