मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की नाक के नीचे कथित अवैध क्लीनिकों का जाल!
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एक निजी अस्पताल पर कार्रवाई कर स्वास्थ्य विभाग थपथपा रहा अपनी पीठ, जिला मुख्यालय में ही करीब 20 बिना डिग्री वाले क्लीनिक संचालित होने का दावा ।

अनूपपुर। जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक निजी अस्पताल पर कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य विभाग अपनी उपलब्धि गिना रहा है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की नाक के नीचे जिला मुख्यालय में ही कथित अवैध क्लीनिक और पैथोलॉजी सेंटर संचालित हो रहे हैं तो उन पर कार्रवाई कब होगी?
स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि जिला मुख्यालय क्षेत्र में ही करीब 20 ऐसे क्लीनिक संचालित हैं, जहां चिकित्सकों की डिग्री, पंजीयन अथवा आवश्यक अनुमति को लेकर सवाल हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा व्यापक जांच किया जाना आवश्यक है।
यदि जिला मुख्यालय पर ही इतनी बड़ी संख्या में कथित अनियमितताएं मौजूद हैं, तो जिले के दूरस्थ गांवों और तहसील क्षेत्रों में संचालित निजी स्वास्थ्य संस्थानों की निगरानी किस स्तर पर हो रही है?
घटना के बाद कार्रवाई या पहले से निगरानी?
स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी केवल किसी घटना के बाद संबंधित अस्पताल या क्लीनिक पर कार्रवाई करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। विभाग को नियमित निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बिना वैध पंजीयन, आवश्यक योग्यता या निर्धारित मानकों के कोई भी व्यक्ति मरीजों का उपचार न करे।
सवाल यह भी है कि जिस संस्थान पर घटना के बाद कार्रवाई होती है, वह उससे पहले विभाग की नियमित निगरानी में क्यों नहीं आया?
अवैध पैथोलॉजी सेंटरों की भी हो जांच
क्लीनिकों के साथ जिले में संचालित निजी पैथोलॉजी सेंटर भी जांच के दायरे में आने चाहिए। उनके पंजीयन, तकनीकी स्टाफ की योग्यता, जांच की सुविधा और निर्धारित मानकों के पालन की जांच जरूरी है।
स्थानीय स्तर पर विभागीय कर्मचारियों और अधिकारियों की जानकारी में कथित रूप से ऐसे संस्थानों के संचालन के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। यदि यह आरोप गलत हैं तो विभाग को स्पष्ट करना चाहिए और यदि सही हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
पूरे जिले का हो स्वास्थ्य संस्थानों का सर्वे
जरूरत इस बात की है कि जिला मुख्यालय से लेकर प्रत्येक तहसील और गांव तक निजी अस्पतालों, क्लीनिकों एवं पैथोलॉजी सेंटरों का व्यापक सर्वे कराया जाए। प्रत्येक संस्थान के पंजीयन, चिकित्सक की योग्यता, अनुमति और उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं की जांच की जाए।
एक कार्रवाई के बाद वाहवाही लूटने के बजाय पूरे जिले में अभियान कब चलेगा?
जनता का सवाल सीधा है—जब मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की नाक के नीचे कथित अवैध क्लीनिकों के संचालन के आरोप हैं, तो पूरे जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था कितनी सुरक्षित है?
अब देखना यह होगा कि स्वास्थ्य विभाग केवल घटना के बाद कार्रवाई कर अपनी पीठ थपथपाता रहेगा या फिर जिलेभर में व्यापक जांच अभियान चलाकर अवैध और अनियमित स्वास्थ्य संस्थानों पर वास्तविक कार्रवाई करेगा।
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