बंडा की हृदयविदारक घटना के बाद क्या जागेगा अनूपपुर आबकारी विभाग?
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होटल-ढाबों से लेकर किराना दुकानों और पान की टपरियों तक कथित अवैध पैकारी का आरोप, गली-गली शराब की उपलब्धता पर जिम्मेदार कौन?
यशपाल जाट अनुपपुर
अनूपपुर। सागर जिले के बंडा में सामने आई हृदयविदारक घटना ने एक बार फिर अवैध शराब के कारोबार और आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना के बाद अब सवाल उठ रहा है कि क्या अनूपपुर जिला आबकारी विभाग भी सबक लेते हुए जिले में कथित अवैध शराब बिक्री और पैकारी के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करेगा?
अनूपपुर जिले की विभिन्न तहसीलों से लेकर जिला मुख्यालय तक शराब की कथित अवैध बिक्री को लेकर सवाल उठते रहे हैं। आरोप है कि लाइसेंसी शराब दुकानों के अलावा होटल, ढाबों, किराना दुकानों और पान की टपरियों तक शराब पहुंच रही है, जहां से कथित रूप से बिना रोक-टोक बिक्री की जा रही है।
यदि यह स्थिति सही है तो सबसे बड़ा सवाल आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था पर खड़ा होता है। आखिर लाइसेंसी दुकान से निकलने वाली शराब निर्धारित बिक्री स्थल से बाहर कथित पैकारी करने वालों तक कैसे पहुंच रही है?

जिला आबकारी अधिकारी खेमराज सिंह की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल
जिले में अवैध शराब बिक्री और कथित पैकारी को लेकर आबकारी विभाग के जिम्मेदार अधिकारी खेमराज की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। सवाल यह है कि यदि विभाग को इन गतिविधियों की जानकारी है तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? और यदि जानकारी नहीं है, तो फिर जिले में निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है?
सबसे गंभीर सवाल यह है कि यदि किसी होटल, ढाबे, किराना दुकान या पान की टपरी पर कथित अवैध शराब बिक्री के कारण कोई अप्रिय घटना होती है, तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी?
अवैध पैकारी करने वाला दुकानदार?
उस तक शराब पहुंचाने वाला लाइसेंसी ठेकेदार?
या फिर कथित अवैध बिक्री पर प्रभावी कार्रवाई नहीं करने वाला प्रशासन?
तहसीलों से जिला मुख्यालय तक निगरानी पर सवाल
अनूपपुर जिले की विभिन्न तहसीलों एवं जिला मुख्यालय में कथित रूप से गली-गली शराब उपलब्ध होने की शिकायतों के बीच आबकारी विभाग की कार्रवाई पर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि लाइसेंसी दुकानों के अलावा अन्य प्रतिष्ठानों पर शराब की बिक्री हो रही है, तो विभाग को इसकी जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
सवाल यह भी है कि पिछले वित्तीय वर्ष में अवैध शराब और पैकारी के खिलाफ आबकारी विभाग ने कितनी कार्रवाई की? कितने प्रकरण दर्ज किए गए? कितनी शराब जब्त की गई और नियमों का उल्लंघन करने वाले लाइसेंसी दुकानदारों के विरुद्ध क्या कार्रवाई हुई?
अब जवाबदेही तय करने का समय
मामला केवल शराब की अवैध बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि जनता की सुरक्षा और कानून व्यवस्था से भी जुड़ा है। यदि नियमों के विपरीत शराब की बिक्री हो रही है तो उसे रोकना संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है।
बंडा की घटना के बाद अब अनूपपुर जिले के लोगों की नजर आबकारी विभाग पर है। देखना होगा कि विभाग इन शिकायतों को गंभीरता से लेकर होटल-ढाबों, किराना दुकानों और पान की टपरियों में होने वाली कथित अवैध शराब बिक्री की जांच करता है या फिर जिम्मेदारों की चुप्पी के बीच यह सिलसिला यूं ही जारी रहता है।
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