टीका पहुंचाने के नाम पर प्रसूता की फोटो मांगने का आरोप, फिर भी नहीं पहुंचती समय पर वैक्सीन ।।
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यशपाल जाट अनुपपुर
प्राथमिक एवं उप स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसव के बाद टीकाकरण व्यवस्था पर सवाल, वीसीसीएम धनेश की कार्यप्रणाली जांच के घेरे में

अनूपपुर। जिले के प्राथमिक एवं उप स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा के टीकाकरण की व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि किसी प्राथमिक या उप स्वास्थ्य केंद्र में महिला का प्रसव होने के बाद वीसीसीएम दिनेश द्वारा बच्चे एवं मां के लिए वैक्सीन उपलब्ध कराने के नाम पर पहले प्रसूता की फोटो मांगी जाती है। इसके बाद भी कई मामलों में वैक्सीन समय पर स्वास्थ्य केंद्र तक नहीं पहुंचने की बात सामने आ रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि टीका उपलब्ध कराने के लिए प्रसूता की फोटो मांगना विभागीय प्रक्रिया का हिस्सा है या नहीं? यदि यह विभागीय प्रक्रिया है तो इसका लिखित आदेश और प्रावधान क्या है? और यदि ऐसा कोई प्रावधान नहीं है तो प्रसूता की फोटो क्यों मांगी जा रही है?
प्रसूता की निजता से खिलवाड़ क्यों?
प्रसूता की तस्वीर उसकी निजी और संवेदनशील जानकारी से जुड़ी है। चिकित्सा आचार नियम मरीज की गोपनीयता और निजता की रक्षा पर जोर देते हैं। NMC के नियमों में मरीज की पहचान उजागर करने वाली तस्वीर या केस रिपोर्ट को उसकी अनुमति के बिना प्रकाशित करने पर रोक का प्रावधान है।
ऐसे में सवाल उठता है कि प्रसूता की फोटो किस उद्देश्य से ली जा रही है, उसे किस अधिकारी को भेजा जाता है, कहां सुरक्षित रखा जाता है और फोटो लेने के लिए महिला की सहमति किस प्रकार ली जाती है?
फोटो मांगी, फिर भी वैक्सीन नहीं पहुंची तो क्यों?
यदि प्रसूता की फोटो भेजना वैक्सीन उपलब्ध कराने की अनिवार्य प्रक्रिया है तो फोटो भेजे जाने के बाद भी वैक्सीन स्वास्थ्य केंद्रों तक समय पर क्यों नहीं पहुंचती?
स्वास्थ्य विभाग को स्पष्ट करना चाहिए—
प्रसूता की फोटो मांगने का आधिकारिक आदेश किसका है?
फोटो लेने और भेजने का उद्देश्य क्या है?
फोटो किस माध्यम से भेजी जाती है और उसका रिकॉर्ड कहां रखा जाता है?
कितने प्रसव के मामलों में फोटो मांगी गई?
फोटो लेने के बाद कितने मामलों में समय पर वैक्सीन उपलब्ध कराई गई?
यदि फोटो नहीं भेजी जाए तो क्या वैक्सीन रोकने का कोई विभागीय प्रावधान है?
जच्चा-बच्चा के स्वास्थ्य से जुड़ा मामला
मामला केवल फोटो मांगने तक सीमित नहीं है। यह मां और नवजात के समय पर टीकाकरण से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। यदि वैक्सीन उपलब्ध कराने में किसी प्रशासनिक प्रक्रिया के कारण देरी हो रही है तो उसकी समीक्षा होना आवश्यक है।
अब सवाल स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से है कि क्या वीसीसीएम दिनेश द्वारा प्रसूता की फोटो मांगने की प्रक्रिया विभाग द्वारा अधिकृत है? यदि हां, तो इसका स्पष्ट आदेश सार्वजनिक किया जाना चाहिए और यदि नहीं, तो इस संबंध में जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जानी चाहिए।
जच्चा-बच्चा को समय पर टीका मिले और प्रसूता की निजता भी सुरक्षित रहे—स्वास्थ्य विभाग को दोनों पहलुओं पर जवाब देना होगा।
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