डिवाइडर, स्ट्रीट लाइट, फुटपाथ, फूल-पौधों और पेड़ों से सजेगा प्रस्तावित गौरव पथ; छोटे कारोबारियों के सामने रोजी-रोटी बचाने की चुनौती
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धरमजयगढ़ – नगर पंचायत धरमजयगढ़ क्षेत्र में प्रस्तावित गौरव पथ के निर्माण की योजना यदि धरातल पर आकार लेती है तो शहर की मुख्य सड़क की तस्वीर पूरी तरह बदलती नजर आ सकती है। सड़क चौड़ीकरण के साथ बीच में आकर्षक डिवाइडर, आधुनिक स्ट्रीट लाइट, दोनों ओर फुटपाथ, फूल-पौधे, व्यवस्थित हरियाली और पेड़ों से सुसज्जित सड़क शहर को नया स्वरूप देने वाली होगी। हालांकि विकास की इस संभावित तस्वीर के साथ एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो रहा है—सड़क चौड़ीकरण की जद में आने वाली सड़क किनारे की दुकानों और वर्षों से कारोबार कर रहे छोटे दुकानदारों का क्या होगा?
प्रस्तावित गौरव पथ की परिकल्पना किसी बड़े शहर की तर्ज पर विकसित सड़क जैसी हो सकती है। चौड़ी सड़क, व्यवस्थित यातायात, डिवाइडर, पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ, आकर्षक प्रकाश व्यवस्था और सड़क किनारे हरियाली से धरमजयगढ़ का मुख्य मार्ग निश्चित रूप से अधिक सुंदर और व्यवस्थित दिखाई देगा। लेकिन इस विकास की कीमत यदि सड़क किनारे वर्षों से छोटी दुकान लगाकर परिवार चलाने वाले दुकानदारों को चुकानी पड़ी, तो उनके वैकल्पिक व्यवस्था का सवाल भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा।

सड़क किनारे चाय-नाश्ता, फल-सब्जी, पान, छोटी किराना दुकान, मोटर मैकेनिक, पंचर, कपड़ा, मोबाइल रिपेयरिंग सहित कई छोटे व्यवसाय लंबे समय से स्थानीय लोगों की आजीविका का साधन बने हुए हैं। इनमें से अनेक दुकानदारों की रोजी-रोटी पूरी तरह इसी स्थान पर निर्भर है। ऐसे में सड़क चौड़ीकरण के दौरान यदि दुकानों का हिस्सा प्रभावित होता है या उन्हें हटाना पड़ता है तो क्या नगर पंचायत या संबंधित निर्माण एजेंसी द्वारा वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराया जाएगा?

यह सवाल इसलिए भी अहम है क्योंकि गौरव पथ केवल सड़क निर्माण की परियोजना नहीं, बल्कि शहर के मौजूदा स्वरूप में बड़ा बदलाव होगा। सड़क की चौड़ाई बढ़ाने, फुटपाथ और डिवाइडर बनाने तथा सौंदर्यीकरण के लिए कितनी भूमि की आवश्यकता होगी, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने आना जरूरी है। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि प्रस्तावित सड़क की सीमा में आने वाले निजी भवन, व्यावसायिक प्रतिष्ठान अथवा अन्य संरचनाओं की स्थिति क्या होगी।
विकास के साथ रोजगार को बचाने के लिये क्या उपाय किये जायेंगे !
क्या छोटे और बड़े सभी दुकानदारों को एक ही तराजू में तौला जायेगा , या सिर्फ छोटे दुकानदारों को निशाना बनाया जायेगा !
यही वह सवाल है जिसका जवाब पदुकानदार और व्यवसायी सबसे पहले जानना चाहेंगे। यदि किसी दुकान को हटाने की आवश्यकता पड़ती है तो क्या पहले नोटिस दिया जाएगा? क्या प्रभावित लोगों का सर्वे कराया जाएगा? क्या उन्हें वैकल्पिक व्यवसायिक स्थल दिया जाएगा? यदि किसी वैध दुकान अथवा संरचना को हटाया जाता है तो नियमानुसार मुआवजा या अन्य राहत का प्रावधान होगा या नहीं? इन सवालों पर स्पष्टता जरूरी है।
वहीं, छोटे दुकानदारों के सामने केवल दुकान हटने का ही संकट नहीं होगा। दुकान बदलने का अर्थ कई लोगों के लिए वर्षों से बने ग्राहक आधार, कारोबार और आय के स्रोत को खोना भी हो सकता है। इसलिए शहर को सुंदर बनाने के साथ-साथ छोटे व्यापारियों के हितों की रक्षा करना भी गौरव पथ परियोजना की सफलता का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाएगा।
स्थानीय लोगों के बीच यह उम्मीद है कि प्रस्तावित गौरव पथ धरमजयगढ़ को एक आधुनिक और व्यवस्थित शहर की पहचान देगा। लेकिन शहर का विकास ऐसा हो जिसमें सड़क चौड़ी हो, फुटपाथ बने, हरियाली बढ़े, रोशनी बेहतर हो और यातायात सुगम हो—साथ ही उन लोगों के लिए भी जगह बनी रहे जिन्होंने वर्षों से सड़क किनारे कारोबार करके शहर की अर्थव्यवस्था को गति दी है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रस्तावित गौरव पथ का नक्शा केवल सड़क और सौंदर्यीकरण को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है या इसमें सड़क किनारे बसे छोटे दुकानदारों, व्यवसायियों के लिये कोई ठोस योजना शामिल है।
धरमजयगढ़ के लिए गौरव पथ विकास की नई पहचान बन सकता है, लेकिन असली गौरव तभी होगा जब विकास के साथ किसी की रोजी-रोटी उजड़ने न पाए।
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