ग्राम कोहका में आयोजित हुआ ‘शिक्षा बाधा से बदलाव कार्यक्रम’! बच्चों की शिक्षा में आने वाली बाधाओं को चित्रकला के माध्यम से किया गया चिन्हांकित!
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जांजगीर-चांपा। दलित अधिकार अभियान संगठन, जिला जांजगीर-चांपा के तत्वावधान में ग्राम पंचायत कोहका स्थित शासकीय प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक शाला में ‘शिक्षा बाधा से बदलाव कार्यक्रम 2026’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्कूली बच्चों की शिक्षा में आने वाली बाधाओं को समझना तथा उनके समाधान की दिशा में सार्थक पहल करना था।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों से उनके स्कूली जीवन में आने वाली विभिन्न समस्याओं एवं बाधाओं पर चर्चा की गई। बच्चों ने चित्रकला (पेंटिंग) के माध्यम से अपनी समस्याओं और अनुभवों को चित्रों के रूप में प्रस्तुत किया। इस गतिविधि के माध्यम से बच्चों की सोच, उनकी कठिनाइयों तथा शिक्षा से जुड़ी चुनौतियों को समझने का प्रयास किया गया।
कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए उनकी समस्याओं को सुनना, समझना और उनके समाधान के लिए सामूहिक प्रयास करना आवश्यक है। शिक्षा में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए विद्यालय, शिक्षक, अभिभावक, सामाजिक संगठन एवं समुदाय की सहभागिता महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम में संगठन एवं विद्यालय के प्रतिनिधि रहे उपस्थित:
इस अवसर पर दलित अधिकार अभियान संगठन के संयोजक श्री विभीषण पात्रे जी, रजनीकांत रत्नाकर, विजय मल्होत्रा, रानू बेगम तथा संगठन के उपाध्यक्ष श्री भूपेश कुर्रे जी उपस्थित रहे।
वहीं विद्यालय की ओर से प्रधान पाठक सुश्री रोहणी भट जी, प्रधान पाठक श्री रामगोपाल कश्यप जी, शिक्षक श्री व्यासनारायण केशी जी, श्री ईश्वर लाल देवांगन जी, श्री लक्ष्मी प्रसाद श्रीवास जी, श्री कमलेश कुमार कश्यप जी, श्री सावेश कुमार सिन्हा जी, सुश्री अंजू यादव सहित विद्यालय के कर्मचारी राकेश कुमार कुर्रे एवं विनोद कुमार खुटे उपस्थित रहे।
बच्चों की समस्याओं को समझने की पहल:
‘शिक्षा बाधा से बदलाव कार्यक्रम’ के माध्यम से बच्चों को अपनी बात रखने और अपनी समस्याओं को रचनात्मक तरीके से व्यक्त करने का अवसर प्रदान किया गया। इस पहल का उद्देश्य बच्चों के लिए शिक्षा का बेहतर वातावरण तैयार करना तथा उनकी शैक्षणिक यात्रा में आने वाली कठिनाइयों को दूर करने की दिशा में प्रयास करना है।
दलित अधिकार अभियान संगठन की यह पहल शिक्षा के क्षेत्र में बच्चों की भागीदारी सुनिश्चित करने और शिक्षा व्यवस्था को अधिक समावेशी एवं संवेदनशील बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
संदेश: “हर बच्चे को मिले शिक्षा का अधिकार, बाधाओं को दूर करना हम सबकी जिम्मेदारी है।”




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