बिना अनुमति पुनर्वास भूमि की रजिस्ट्री और तत्काल नामांतरण पर हुईं शिकायत , जांच शुरू!
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धरमजयगढ़ कॉलोनी क्षेत्र से जुड़े एक मामले में ग्राम बायसी कॉलोनी स्थित पुश्तैनी एवं पुनर्वास भूमि की कथित नियम-विरुद्ध रजिस्ट्री और संदेहास्पद नामांतरण प्रक्रिया को लेकर प्रशासन में शिकायत पहुंची है। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर नामांतरण की कार्यवाही निरस्त करने की मांग की है।

परिवार की बिना रजामंदी और सक्षम अनुमति के भूमि बेचने का आरोप
शिकायत में बताया गया है कि ग्राम बायसी कॉलोनी में स्थित खसरा नंबर 96/1, रकबा 0.931 हेक्टेयर भूमि पूर्व में परिवार के एक सदस्य के नाम दर्ज थी। शिकायतकर्ता के अनुसार उक्त भूमि पुश्तैनी होने के साथ पुनर्वास योजना के तहत प्राप्त हुई थी। आरोप है कि 13 जुलाई 2023 को परिवार के अन्य सदस्यों की सहमति तथा सक्षम अधिकारी की आवश्यक अनुमति के बिना उक्त भूमि का विक्रय कर दिया गया।

रजिस्ट्री के महज पांच दिन बाद नामांतरण पर सवाल
शिकायत में राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि रजिस्ट्री के महज पांच दिन बाद, 18 जुलाई 2023 को तत्कालीन तहसीलदार भोज कुमार डहरिया द्वारा भूमि का नामांतरण क्रेता के पक्ष में कर दिया गया। शिकायतकर्ता का दावा है कि नामांतरण से पहले नियमानुसार जांच, अभिलेखों के परीक्षण तथा दावा-आपत्ति की प्रक्रिया का पर्याप्त पालन नहीं किया गया।

विवादित भूमि के डायवर्सन पर भी उठे सवाल
शिकायत के मुताबिक मामला नामांतरण तक ही सीमित नहीं रहा। उक्त भूमि के संबंध में 12 अक्टूबर 2023 को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) न्यायालय, धरमजयगढ़ द्वारा मुर्गा फार्म सह गोदाम निर्माण के लिए व्यपवर्तन (डायवर्सन) आदेश भी पारित किया गया। शिकायतकर्ता ने इस कार्रवाई की वैधानिकता पर भी सवाल उठाते हुए कहा है कि पुनर्वास भूमि के हस्तांतरण और उसके उपयोग परिवर्तन के लिए लागू नियमों एवं सक्षम अनुमति की स्थिति की जांच आवश्यक है।
पटवारी से मांगा गया जमीनी प्रतिवेदन
मामले में लगाए गए आरोपों की वास्तविकता सामने लाने के लिए हल्का पटवारी से संबंधित भूमि एवं राजस्व अभिलेखों के आधार पर विस्तृत प्रतिवेदन मांगे जाने की जानकारी सामने आई है। अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि भूमि के विक्रय, नामांतरण और बाद में किए गए डायवर्सन की प्रक्रिया में सभी वैधानिक प्रावधानों का पालन हुआ था या नहीं।
शिकायतकर्ता ने प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराते हुए यदि नियमों का उल्लंघन प्रमाणित हो तो संबंधित नामांतरण एवं डायवर्सन कार्रवाई को निरस्त करने तथा जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।
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