थाना प्रभारी जितेंद्र ताम्रकार की विवेचना का असर: 62 वर्षीय आरोपी को गंभीर पॉक्सो मामले 20 साल की सजा
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कांसाबेल के गंभीर पॉक्सो मामले में एफआईआर के 40 दिन के भीतर फैसला, अभियोग पत्र पेश होने के 23 दिन बाद न्यायालय ने सुनाई सजा
जशपुर जिले के कांसाबेल थाना क्षेत्र में 7 वर्षीय बालिका से दुष्कर्म के गंभीर पॉक्सो मामले में पुलिस की त्वरित और गुणवत्तापूर्ण विवेचना का परिणाम सामने आया है। मामले में थाना प्रभारी एवं विवेचक जितेंद्र कुमार ताम्रकार की विवेचना तथा अभियोजन की प्रभावी पैरवी के बाद न्यायालय ने 62 वर्षीय आरोपी विनोद एक्का उर्फ जशपुरिया उर्फ छोटा दादू को दोषसिद्ध करते हुए 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
इस मामले की खास बात यह रही कि एफआईआर दर्ज होने के महज 40 दिन के भीतर न्यायालय से सजा का फैसला आया, जबकि पुलिस द्वारा अभियोग पत्र प्रस्तुत किए जाने के 23 दिन बाद ही न्यायालय ने अपना निर्णय सुना दिया।
ताम्रकार की विवेचना में जुटाए गए साक्ष्य बने अहम आधार
पुलिस के अनुसार, प्रकरण की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए थाना प्रभारी जितेंद्र कुमार ताम्रकार ने मामले की विवेचना को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया। विवेचना के दौरान घटनास्थल का निरीक्षण कर नजरी नक्शा तैयार किया गया और पीड़िता सहित संबंधित साक्षियों के बयान दर्ज किए गए।
इसके साथ ही पीड़िता का चिकित्सीय परीक्षण कराया गया तथा आरोपी का भी चिकित्सीय परीक्षण कराया गया। प्रकरण से संबंधित दस्तावेजी एवं वैज्ञानिक साक्ष्यों का विधिवत संकलन किया गया।
विवेचना के दौरान प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के विरुद्ध संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई करते हुए 2 सितंबर 2026 को अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
क्या है पूरा मामला?
पुलिस के अनुसार, कांसाबेल थाना क्षेत्र में पीड़िता के पिता ने 13 अगस्त 2026 को थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत के अनुसार, 7 वर्षीय बालिका 9 अगस्त 2026 की शाम करीब 6 बजे गांव के एक व्यक्ति के घर में टीवी देखते हुए खाना खा रही थी। इसी दौरान आरोपी विनोद एक्का उर्फ जशपुरिया उर्फ छोटा दादू वहां पहुंचा और बालिका को रोटी खाने के लिए अपने साथ ले गया।
पुलिस के अनुसार, आरोपी बालिका को अपने घर ले गया और वहां दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। काफी समय बीतने के बाद जब बालिका वापस नहीं आई तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की।
इसी दौरान गांव के एक व्यक्ति ने आरोपी के घर की खिड़की से अंदर देखने की बात बताई और बाद में बालिका को वहां से वापस लाया गया। अगले दिन परिजनों द्वारा बालिका से घटना के संबंध में पूछताछ की गई, जिसके बाद मामले की जानकारी सामने आई।
इसके बाद पीड़िता के पिता ने 13 अगस्त को थाना कांसाबेल में रिपोर्ट दर्ज कराई।
मामले में अपराध क्रमांक 151/2026 दर्ज कर आरोपी के विरुद्ध धारा 65(2) बीएनएस तथा धारा 4 और 6 पॉक्सो अधिनियम के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की गई।
23 दिन में अभियोग पत्र पर आया फैसला
पुलिस द्वारा विवेचना पूरी करने के बाद 2 सितंबर 2026 को अभियोग पत्र न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश, एफटीसी जशपुर श्री जनार्दन खरे के न्यायालय में हुई। न्यायालय ने मामले की सुनवाई के बाद 24 सितंबर 2026 को निर्णय सुनाया।
इस तरह अभियोग पत्र प्रस्तुत होने के महज 23 दिन बाद आरोपी को दोषसिद्ध कर सजा सुनाई गई। वहीं एफआईआर दर्ज होने से न्यायालय के निर्णय तक लगभग 40 दिन का समय लगा।
13 साक्षियों का परीक्षण, अभियोजन की प्रभावी पैरवी
प्रकरण में अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक (पॉक्सो) श्री अनुपम कुमार तिर्की ने पैरवी की।
विचारण के दौरान अभियोजन की ओर से पीड़िता सहित कुल 13 साक्षियों का परीक्षण कराया गया। इसके अलावा मामले से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज और अन्य साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए।
पुलिस के अनुसार, विवेचक जितेंद्र कुमार ताम्रकार द्वारा संकलित साक्ष्यों और विशेष लोक अभियोजक अनुपम कुमार तिर्की की पैरवी के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषसिद्ध किया।
आरोपी को इन धाराओं में मिली सजा
न्यायालय द्वारा आरोपी विनोद एक्का उर्फ जशपुरिया उर्फ छोटा दादू, उम्र 62 वर्ष को विभिन्न धाराओं में दंडित किया गया।
- धारा 65(2) बीएनएस: 20 वर्ष का सश्रम कारावास एवं ₹2,000 अर्थदंड।
- धारा 127(2) बीएनएस: 1 वर्ष का सश्रम कारावास एवं ₹1,000 अर्थदंड।
- धारा 6 पॉक्सो अधिनियम: 20 वर्ष का सश्रम कारावास एवं ₹2,000 अर्थदंड।
अर्थदंड अदा नहीं करने की स्थिति में अतिरिक्त कारावास का प्रावधान किया गया है। न्यायालय के आदेश के अनुसार कारावास की सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
पहले भी पॉक्सो मामले में प्रभावी विवेचना कर चुके हैं जितेंद्र ताम्रकार
पुलिस के अनुसार, थाना प्रभारी जितेंद्र कुमार ताम्रकार इससे पहले भी कांसाबेल थाना क्षेत्र के एक गंभीर पॉक्सो मामले की विवेचना कर चुके हैं। उक्त मामले में 13 वर्षीय बालिका से लंबे समय तक दुष्कर्म के आरोप से संबंधित प्रकरण में न्यायालय द्वारा आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।
ताजा मामले में भी ताम्रकार द्वारा घटनास्थल निरीक्षण, बयान, चिकित्सीय परीक्षण और उपलब्ध साक्ष्यों के संकलन के बाद समयबद्ध तरीके से अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में हुई कार्रवाई
जशपुर पुलिस के अनुसार, पूरी कार्रवाई डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जशपुर डॉ. लाल उमेद सिंह के निर्देश तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जशपुर श्री राकेश कुमार पाटनवार के मार्गदर्शन में की गई।
पुलिस का कहना है कि गंभीर एवं संवेदनशील अपराधों में त्वरित, निष्पक्ष और गुणवत्तापूर्ण विवेचना के साथ वैज्ञानिक साक्ष्यों का संकलन तथा प्रभावी अभियोजन सुनिश्चित करने की दिशा में लगातार कार्रवाई की जा रही है।
40 दिन में फैसला, विवेचना पर खास नजर
कांसाबेल के इस मामले में थाना प्रभारी जितेंद्र कुमार ताम्रकार की विवेचना, अभियोजन की पैरवी और न्यायालय की त्वरित सुनवाई के चलते मामला कम समय में निर्णय तक पहुंचा। एफआईआर से सजा तक 40 दिन और अभियोग पत्र से निर्णय तक 23 दिन का समय इस मामले की सबसे प्रमुख विशेषताओं में रहा।
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