लात के प्रभावितों के हक की लड़ाई तेज, विधायक राठिया ने कलेक्टर को सौंपा पत्र
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खदान का विस्तार 6 से 12 एमटीपीए, लेकिन प्रभावितों के अधिकार और स्थानीय युवाओं के रोजगार पर पहले ठोस कार्रवाई की मांग

धरमजयगढ़ / छाल – एसईसीएल की छाल खुली कोयला खदान परियोजना के विस्तार की प्रक्रिया के बीच ग्राम लात के प्रभावित ग्रामीणों के अधिकार और स्थानीय युवाओं के रोजगार का मुद्दा जोर पकड़ता जा रहा है। खदान की क्षमता 6.0 एमटीपीए से बढ़ाकर 12 एमटीपीए करने की तैयारी के बीच क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने अब प्रशासन के समक्ष प्रभावित परिवारों के अधिकारों और स्थानीय रोजगार को लेकर निर्णायक पहल की मांग रखी है। इस संबंध में विधायक लालजीत सिंह राठिया सहित क्षेत्र के सरपंचों के समर्थन से कलेक्टर रायगढ़ को पत्र सौंपा गया है।
पत्र में साफ तौर पर कहा गया है कि ग्राम लात की भूमि एसईसीएल द्वारा कोयला खनन परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई है। भूमि अधिग्रहण के बाद प्रभावित ग्रामीणों को पुनर्वास, रोजगार सहित विभिन्न अधिकार दिए जाने का प्रावधान रहा है, लेकिन प्रभावित परिवारों को अब तक उनके अधिकारों और रोजगार का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाने की स्थिति बनी हुई है।
हाईकोर्ट के आदेश का पूर्ण पालन कराने की मांग

जनप्रतिनिधियों ने मामले में माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर के आदेश क्रमांक 6013/2024, दिनांक 27 जनवरी 2026 का हवाला देते हुए प्रशासन से आदेश का अक्षरशः पालन सुनिश्चित कराने की मांग की है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि परियोजना विस्तार से पहले प्रभावित परिवारों के लंबित अधिकारों का निराकरण और उन्हें पात्रतानुसार लाभ दिलाना आवश्यक है।
प्रभावित परिवारों की जमीन लेकर परियोजना को विस्तार देने से पहले उनके पुनर्वास और रोजगार से जुड़े अधिकारों को प्राथमिकता देने की मांग ने अब प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन की जिम्मेदारी बढ़ा दी है।
6 से 12 एमटीपीए विस्तार से पहले प्रभावितों के हक का हिसाब जरूरी
छाल खुली खदान की उत्पादन क्षमता दोगुनी किए जाने की प्रक्रिया के बीच 29 सितंबर 2026 को पर्यावरणीय स्वीकृति के लिए लोक सुनवाई प्रस्तावित है। इसी पृष्ठभूमि में जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि लोक सुनवाई से पहले प्रभावित परिवारों के अधिकारों की स्थिति स्पष्ट की जाए और लंबित प्रकरणों का निराकरण किया जाए।
जनप्रतिनिधियों का कहना है कि परियोजना का विस्तार केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इससे प्रभावित लोगों के जीवन, पुनर्वास और रोजगार को भी प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
स्थानीय युवाओं को ठेका कार्यों में भी मिले प्राथमिकता
पत्र में क्षेत्र के स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार मेला और रोजगार शिविर आयोजित करने की मांग की गई है। साथ ही एसईसीएल में उपलब्ध रोजगार अवसरों की जानकारी सार्वजनिक करने, युवाओं को आवश्यक कौशल प्रशिक्षण एवं अप्रेंटिसशिप उपलब्ध कराने तथा परियोजना से जुड़े रोजगार के अवसरों में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देने की मांग रखी गई है।
एसईसीएल की परियोजनाओं और उनसे जुड़े ठेका कार्यों में स्थानीय युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी विशेष जोर दिया गया है। जनप्रतिनिधियों ने कहा है कि क्षेत्र की जमीन और संसाधनों से संचालित परियोजनाओं में स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सुनिश्चित होना चाहिए।
लोक सुनवाई से पहले ठोस कार्ययोजना की मांग
पत्र में 29 सितंबर को होने वाली लोक सुनवाई के दौरान प्रभावित ग्रामीणों और स्थानीय युवाओं की समस्याओं तथा रोजगार संबंधी मांगों का उचित निराकरण सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है। साथ ही परियोजना विस्तार से पहले प्रभावित परिवारों और स्थानीय युवाओं के हित में ठोस, स्पष्ट और समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने की मांग की गई है।
विधायक लालजीत सिंह राठिया और क्षेत्रीय सरपंचों की ओर से कलेक्टर को सौंपे गए इस पत्र के बाद अब प्रशासनिक कार्रवाई पर क्षेत्र की निगाहें टिकी हैं। छाल खदान के विस्तार से उत्पादन क्षमता भले ही दोगुनी होने जा रही हो, लेकिन जनप्रतिनिधियों ने स्पष्ट कर दिया है कि विकास की इस प्रक्रिया में लात के प्रभावित परिवारों के अधिकार और स्थानीय युवाओं का रोजगार पीछे नहीं छूटना चाहिए।
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