55 की उम्र में 62वीं कांवड़ भरने गंगाजू के लिए रवाना हुए केशव सिंह कुशवाहा
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अम्बाह। आस्था और भक्ति की कोई उम्र नहीं होती। इसी बात को चरितार्थ कर रहे हैं ग्राम पंचायत कमतरी के कुर्री गांव निवासी केशव सिंह कुशवाहा, जो 55 वर्ष की उम्र में भगवान शिव के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा के चलते 62वीं कांवड़ भरने के लिए गंगाजू के लिए रवाना हुए हैं। उनकी वर्षों से चली आ रही कांवड़ यात्रा क्षेत्र में चर्चा और आकर्षण का विषय बनी हुई है।केशव सिंह कुशवाहा लंबे समय से कांवड़ यात्रा की परंपरा को निभाते आ रहे हैं। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनके उत्साह और धार्मिक आस्था में कोई कमी नहीं आई है। वे पूरे श्रद्धाभाव के साथ कांवड़ यात्रा करते हैं और भगवान शिव को जल अर्पित करते हैं।

7 अगस्त को चढ़ाई कांवड़, अब 27 अगस्त को 62वीं कांवड़:— जानकारी के अनुसार केशव सिंह कुशवाहा ने 7 अगस्त को कांवड़ चढ़ाई थी। अब वे एक बार फिर धार्मिक यात्रा पर निकले हैं और 27 अगस्त को अपनी 62वीं कांवड़ चढ़ाएंगे। उनकी इस यात्रा को लेकर परिवार, परिचितों और ग्रामीणों में खासा उत्साह है।बताया जाता है कि केशव सिंह कुशवाहा एक वर्ष में दो बार कांवड़ यात्रा करते हैं। वे सावन माह में कांवड़ लेकर आते हैं तथा दूसरी बार महाशिवरात्रि के अवसर पर फाल्गुन माह में कांवड़ यात्रा की परंपरा निभाते हैं। वर्षों से जारी उनकी यह धार्मिक यात्रा उनके दृढ़ संकल्प और भगवान शिव के प्रति गहरी आस्था को दर्शाती है।

उम्र 55 की लेकिन भक्ति का उत्साह युवाओं जैसा :— 55 वर्ष की उम्र में 62वीं कांवड़ यात्रा करना अपने आप में उनके लिए एक विशेष उपलब्धि है। लगातार कांवड़ यात्रा करते हुए उन्होंने धार्मिक आस्था और संकल्प का परिचय दिया है। उनकी यात्रा को देखकर ग्रामीणों का कहना है कि सच्ची श्रद्धा के सामने उम्र कभी बाधा नहीं बनती।कुर्री गांव से गंगाजू के लिए रवाना हुए केशव सिंह कुशवाहा की यात्रा की जानकारी आसपास के लोगों में भी पहुंच रही है। ग्रामीण उनकी इस धार्मिक यात्रा को आस्था, संकल्प और शिवभक्ति की अनोखी मिसाल बता रहे हैं।

वर्षों से निभा रहे हैं कांवड़ यात्रा की परंपरा :—— केशव सिंह कुशवाहा का कहना है कि भगवान शिव के प्रति उनकी श्रद्धा और विश्वास ही उन्हें बार-बार कांवड़ यात्रा के लिए प्रेरित करता है। सावन और महाशिवरात्रि के अवसर पर कांवड़ लाने की उनकी परंपरा वर्षों से चली आ रही है।उनकी 62वीं कांवड़ यात्रा को लेकर कुर्री गांव सहित आसपास के क्षेत्र में भी चर्चा बनी हुई है। परिवार और ग्रामीणों ने उनकी यात्रा मंगलमय होने तथा सकुशल वापसी की कामना की है।55 वर्ष की उम्र में 62वीं कांवड़—केशव सिंह कुशवाहा की यह यात्रा निश्चित रूप से शिवभक्ति, संकल्प और आस्था की प्रेरणादायक कहानी बन गई है।
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