24×7 स्वास्थ्य सेवा के दावे धराशायी, सीएचसी पामगढ़ के मुख्य द्वार पर ताला लगा मिला
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जांजगीर-चांपा/पामगढ़, 26 अगस्त 2026। विकासखंड मुख्यालय पामगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर चर्चा में आ गई है। मंगलवार सुबह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के मुख्य द्वार पर ताला लगा होने की घटना सामने आई। 24×7 स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने का दावा करने वाले इस अस्पताल का गेट बंद मिलने से दूर-दराज़ के गांवों से इलाज के लिए पहुंचे मरीज और उनके परिजन बेहद परेशान नजर आए।

अस्पताल के मुख्य द्वार पर लगा ताला देखकर लोगों में नाराजगी फैल गई। कई मरीज और उनके स्वजन अस्पताल बंद पाकर लौटने को मजबूर हुए। इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली, अस्पताल प्रबंधन की निगरानी और 24×7 सेवा के दावों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
लगातार शिकायतों के बावजूद सुधार नहीं :
स्थानीय लोगों का कहना है कि पामगढ़ सीएचसी में चिकित्सकों और कर्मचारियों के निर्धारित समय पर उपलब्ध न रहने, ओपीडी के सही संचालन न होने तथा साफ-सफाई की कमी को लेकर पहले भी कई शिकायतें आ चुकी हैं। इसके बावजूद व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया है। परिणामस्वरूप मरीजों की परेशानी लगातार बनी हुई है।
लोगों का आरोप है कि यह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए प्रमुख चिकित्सा सुविधा केंद्र है। ऐसे में समय पर स्वास्थ्य सेवा न मिलना गंभीर मसला है। मरीजों को बंद दरवाजे के सामने खड़ा नहीं होना चाहिए।
24×7 का दावा, फिर ताला क्यों?
अस्पताल के मुख्य द्वार पर ताला लगने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि यदि किसी मरीज को सुबह-सुबह या आपात स्थिति में उपचार की जरूरत पड़ जाए तो वह कहां जाए? अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि सफाई का कार्य चल रहा था, जिसके कारण गेट बंद रखा गया। लेकिन सफाई के दौरान मरीजों के प्रवेश के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं दिखाई दी? यह सवाल अनुत्तरित है। स्वास्थ्य सेवा बाधित न हो, इसकी जिम्मेदारी भी अस्पताल प्रबंधन की ही मानी जाती है।
जनप्रतिनिधियों ने जताई नाराजगी:
विधायक शेरराज हरवंश ने मामले पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि अस्पताल बंद होना गलत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अस्पताल गरीब और जरूरतमंद लोगों के इलाज के लिए है। ग्रामीण बड़ी उम्मीद लेकर सरकारी अस्पताल पहुंचते हैं। अगर वहां ताला लगा मिले तो स्थिति गंभीर हो जाती है। विधायक ने जोर देकर कहा कि 24×7 सेवा वाले अस्पताल में किसी भी समय मरीज को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए। व्यवस्था में सुधार बेहद जरूरी है।
बसपा की पूर्व विधायक इंदु बंजारे ने भी पामगढ़ सीएचसी की व्यवस्थाओं पर नाराजगी जताई। उन्होंने बताया कि वे स्वयं कई बार अस्पताल जा चुकी हैं और वहां स्टाफ की कमी तथा साफ-सफाई को लेकर शिकायतें देखी हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई है। बंजारे ने चेतावनी दी कि नया भवन मिलने के बावजूद यदि स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार नहीं होता है तो आंदोलन किया जाएगा।
भाजपा अजा मोर्चा के प्रदेश कार्यकारी सदस्य एवं पामगढ़ विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी संतोष कुमार लहरे ने कहा कि ड्यूटी पर आने वाले डॉक्टर को किसी कारण से 5-10 मिनट का विलंब हो सकता है, लेकिन ओपीडी ही बंद मिलना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि सीएचसी में 24 घंटे स्वास्थ्य सेवा का प्रावधान है। मुख्य द्वार पर ताला लगना व्यवस्था की गंभीर कमी को दर्शाता है।
प्रशासन का पक्ष:
पामगढ़ प्रभारी बीएमओ डॉ. रश्मि डाहीरे ने बताया कि अस्पताल में सफाई का कार्य चल रहा था, इसलिए अस्पताल को बंद रखा गया था। हालांकि, मुख्य द्वार पर ताला लगाए जाने की बात से उन्होंने इनकार किया। बीएमओ के बयान के बावजूद यह सवाल बना हुआ है कि सफाई के दौरान आपात मरीजों के लिए वैकल्पिक प्रवेश व्यवस्था क्या थी।
जिम्मेदारी तय करने की मांग तेज:
स्वास्थ्य केंद्र को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही हैं। मंगलवार की घटना के बाद स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मामले की जांच कराने तथा दोषियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पताल गरीब और ग्रामीण परिवारों के लिए उपचार का प्रमुख सहारा है। 24×7 सेवा वाले अस्पताल में किसी भी स्थिति में मरीजों को बंद दरवाजे के सामने नहीं खड़ा होना चाहिए।
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