भारतमाला के वन प्रस्ताव की उलझी कहानी, वन प्रस्ताव में बड़ा खेल बनाम बड़ा बदलाव ?
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धरमजयगढ़ भारतमाला परियोजना के उरगा–पत्थलगांव खंड के लिए प्रस्तुत वन भूमि डायवर्जन प्रस्ताव पर राज्य स्तर की जांच के दौरान कई गंभीर तकनीकी एवं दस्तावेजी आपत्तियां दर्ज की गई हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रस्ताव को आगे बढ़ाने से पहले परियोजना प्राधिकरण से एक के बाद एक कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तृत स्पष्टीकरण और दस्तावेज मांगे गए।
सबसे अहम सवाल उस बड़े बदलाव को लेकर उठाया गया, जिसमें पहले लगभग 169.0231 हेक्टेयर वन भूमि का प्रस्ताव प्रस्तुत होने के बाद संशोधित प्रस्ताव में यह क्षेत्रफल घटकर 23.214 हेक्टेयर रह गया। संबंधित अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से पूछा कि सड़क के एलाइनमेंट में परिवर्तन क्यों किया गया और वन भूमि के क्षेत्रफल में इतना बड़ा अंतर किस आधार पर आया।
यही नहीं, परियोजना से संबंधित जीपीएस आधारित डिजिटल मानचित्र (केएमएल), सड़क का क्रॉस-सेक्शन, वर्तमान एवं प्रस्तावित राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू), खसरा एवं वन कम्पार्टमेंटवार विवरण, पुल-पुलिया एवं अन्य प्रस्तावित संरचनाओं का पृथक विवरण भी उपलब्ध कराने को कहा गया। इससे संकेत मिलता है कि प्रस्तुत दस्तावेजों को पर्याप्त नहीं माना गया।
अधिकारियों ने कलेक्टर का अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी), प्रतिपूरक वनीकरण के लिए चिन्हित भूमि का पूरा विवरण, निर्धारित शुल्क जमा करने का प्रमाण तथा यह घोषणा भी मांगी कि क्या इसी परियोजना के लिए पूर्व में भी वन स्वीकृति का आवेदन किया गया था।
इन सभी बिंदुओं से यह स्पष्ट होता है कि प्रस्ताव को तत्काल स्वीकृति नहीं दी गई, बल्कि विस्तृत जानकारी और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि यदि प्रारंभिक प्रस्ताव पूरी तैयारी और सभी आवश्यक अभिलेखों के साथ था, तो फिर इतनी बड़ी संख्या में स्पष्टीकरण और दस्तावेजों की आवश्यकता क्यों पड़ी?
अब निगाहें इस बात पर हैं कि परियोजना प्राधिकरण ने इन सभी आपत्तियों का क्या उत्तर दिया, 169.0231 हेक्टेयर से 23.214 हेक्टेयर तक वन भूमि घटने का औचित्य क्या बताया, और क्या संबंधित अधिकारी इन स्पष्टीकरणों से संतुष्ट हुए। इन सवालों के जवाब ही इस पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने लाएंगे।
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