वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और स्वदेशी दृष्टिकोण पर मंथन के साथ एकेएस विश्वविद्यालय में ‘ग्लोबल मार्केट फोर्सेज’ सतना चैप्टर का शुभारंभ
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सतना। एकेएस विश्वविद्यालय, सतना के विवेकानंद सभागार में मंगलवार को ‘ग्लोबल मार्केट फोर्सेज (वैश्विक बाजारवादी शक्तियां)’ विषय पर आयोजित वैचारिक संगोष्ठी के साथ ग्लोबल मार्केट फोर्सेज के सतना चैप्टर का विधिवत शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम में वैश्विक आर्थिक व्यवस्था, बाजारवाद के बढ़ते प्रभाव, स्वदेशी चिंतन तथा आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा पर गहन मंथन किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के पदाधिकारी, शिक्षाविद, प्रबुद्धजन, शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का विषय प्रवेश एवं परिचय ग्लोबल मार्केट फोर्सेज के प्रांत संयोजक आलोक सिंह ने कराया। उन्होंने संगठन की कार्यप्रणाली, उद्देश्यों तथा वर्तमान वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में ऐसे वैचारिक विमर्शों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
मुख्य वक्ता कैलाश चंद्र ने वैश्विक बाजारवादी शक्तियों के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक प्रभावों का विश्लेषण करते हुए कहा कि वैश्वीकरण के वर्तमान दौर में भारत के सामने अनेक चुनौतियों के साथ नए अवसर भी उपस्थित हैं। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे राष्ट्रहित को केंद्र में रखते हुए आर्थिक नीतियों, वैश्विक व्यापार व्यवस्था और बदलते बाजार तंत्र का गंभीर अध्ययन करें, जिससे वे भविष्य के उत्तरदायी नीति-निर्माता, उद्यमी और जागरूक नागरिक बन सकें।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत कार्यवाह उत्तम बनर्जी ने भारतीय चिंतन, स्वदेशी दृष्टिकोण और आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को वर्तमान समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा के इस युग में भारत अपनी सांस्कृतिक चेतना, आत्मविश्वास और आर्थिक सामर्थ्य के आधार पर विश्व समुदाय में सशक्त भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि विकास का भारतीय मॉडल आर्थिक प्रगति के साथ सांस्कृतिक मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व को भी समान महत्व देता है।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति (विकास) डॉ. हर्षवर्धन श्रीवास्तव तथा कुलसचिव डॉ. आर. एस. त्रिपाठी मंचासीन रहे। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन राकेश तिवारी ने किया, जबकि विश्वविद्यालय के फैकल्टी डॉ. प्रदीप चौरसिया ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के समस्त पदाधिकारी, अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष, शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने सहभागिता की। राष्ट्रहित, स्वदेशी चिंतन, आत्मनिर्भर भारत और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों पर सार्थक विमर्श के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
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