एकेएस विश्वविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर सप्ताहव्यापी योग कार्यक्रम का समापन
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सतना। नैक एक्रेडिटेड एवं यूजीसी से मान्यता प्राप्त एकेएस विश्वविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आयोजित सप्ताहव्यापी योग कार्यक्रम का समापन योग एवं आध्यात्मिक चेतना के संदेश के साथ संपन्न हुआ। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय एवं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की गाइडलाइन के अनुरूप आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी, शोधार्थी एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

एक सप्ताह तक चले इस योग अभियान के दौरान योग विशेषज्ञों एवं विद्वानों ने योग के वैज्ञानिक, व्यावहारिक एवं आध्यात्मिक पक्षों पर अपने विचार साझा किए। समापन अवसर पर प्रतिभागियों ने सामूहिक योगाभ्यास, प्राणायाम एवं ध्यान के माध्यम से स्वस्थ एवं संतुलित जीवनशैली अपनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि योग भारतीय संस्कृति की ऐसी अमूल्य धरोहर है, जो व्यक्ति के तन, मन और आत्मा के मध्य सामंजस्य स्थापित करती है। वर्तमान समय में बढ़ते तनाव, अनियमित जीवनशैली और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के बीच योग मानव जीवन के लिए एक प्रभावी एवं सर्वसुलभ समाधान के रूप में उभरा है।

नियमित योगाभ्यास न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ करता है, बल्कि मानसिक शांति, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच का भी विकास करता है। विश्वविद्यालय के प्रो-चांसलर इंजी. अनंत कुमार सोनी ने अपने संदेश में कहा कि योग भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा का विश्व को दिया गया अनुपम उपहार है। स्वस्थ और सशक्त समाज के निर्माण के लिए योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना आवश्यक है।

वहीं कुलपति प्रो. बी. ए. चोपड़े ने कहा कि योग विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास, एकाग्रता और मानसिक संतुलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है तथा इसे जीवनचर्या का अभिन्न अंग बनाया जाना चाहिए। यह सप्ताहव्यापी योग कार्यक्रम योग विभागाध्यक्ष डॉ. दिलीप तिवारी के मार्गदर्शन एवं संयोजन में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। डॉ. तिवारी ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि योग केवल स्वास्थ्य संरक्षण का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन को अनुशासित, संतुलित और उद्देश्यपूर्ण बनाने की प्रक्रिया है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से नियमित योगाभ्यास करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के शिक्षक, कर्मचारी, शोधार्थी एवं विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। अंत में सभी प्रतिभागियों ने योग को जन-जन तक पहुँचाने तथा स्वस्थ, जागरूक और सकारात्मक समाज के निर्माण में योगदान देने का संकल्प लिया।

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