आधुनिक जीवन में संतुलन और स्वास्थ्य का आधार है योग : डॉ. रत्नेश पाण्डेय
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सतना, 17 जून। एकेएस विश्वविद्यालय में आयोजित सात दिवसीय व्याख्यानमाला के तृतीय दिवस पर “आधुनिक जीवन में योग का महत्व” विषय पर व्याख्यान आयोजित किया गया। मुख्य वक्ता डॉ. रत्नेश पाण्डेय ने कहा कि बढ़ते तनाव, अनियमित दिनचर्या और बदलती जीवनशैली के बीच योग स्वस्थ एवं संतुलित जीवन का प्रभावी माध्यम है।

डॉ. पाण्डेय ने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और चेतना के समन्वित विकास का विज्ञान है। भारतीय ज्ञान परंपरा की यह धरोहर आज विश्वभर में स्वीकार्यता प्राप्त कर रही है। नियमित योगाभ्यास से प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, तनाव कम होता है तथा आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच का विकास होता है।
उन्होंने विद्यार्थियों से योग, प्राणायाम और ध्यान को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का आग्रह करते हुए कहा कि योग एकाग्रता, स्मरण शक्ति और आत्मानुशासन को सुदृढ़ करता है। स्वस्थ और अनुशासित युवा ही सशक्त राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
योग के वैज्ञानिक पक्षों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि अनेक शोधों में योग को जीवनशैली जनित रोगों की रोकथाम और नियंत्रण में उपयोगी पाया गया है। संतुलित आहार, नियमित दिनचर्या और सकारात्मक चिंतन को उन्होंने योगमय जीवन के आवश्यक तत्व बताया।
कार्यक्रम में प्रो. महेंद्र तिवारी, प्रो. कमलेश साजलकर, कार्यक्रम प्रभारी डॉ. दिलीप तिवारी, निशा त्रिपाठी तथा श्री शंखधर मिश्रा सहित शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
प्रश्नोत्तर सत्र में प्रतिभागियों ने योग और स्वस्थ जीवनशैली से जुड़े प्रश्न पूछे, जिनका डॉ. पाण्डेय ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण से उत्तर दिया। कार्यक्रम के अंत में मुख्य वक्ता का सम्मान किया गया तथा उपस्थितजनों ने योग को दैनिक जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
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